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Faridabad News: एनआईए और जम्मू कश्मीर पुलिस फिर पहुंची यूनिवर्सिटी परिसर

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मौजूदा स्टॉफ व अन्य डॉक्टरों, छात्रों की भूमिका को लेकर चल रही जांच
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दोपहर बाद लगभग 3 बजे टीमें यहां पहुंची

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। अल-फलाह यूनिवर्सिटी में आतंकी मॉड्यूल और दिल्ली बम धमाके को लेकर शुक्रवार को भी जांच एजेंसियों की टीमें पहुंचीं। एनआईए और जम्मू कश्मीर पुलिस की टीमें दोपहर बाद यूनिवर्सिटी परिसर पहुंचीं और जांच शुरू की। टीमों ने यहां मौजूद कुछ स्टॉफ, डॉक्टरों व छात्रों की भूमिका को लेकर जांच की। इस दौरान बृहस्पतिवार को यूनिवर्सिटी परिसर से पकड़े गए वासिद को लेकर भी टीम ने उसके सहकर्मियों से पूछताछ की। वासिद वही है जिसने लाल रंग की इको स्पोर्ट कार को खंदावली गांव में अपने रिश्तेदार फहीम के घर खड़ा किया था।

यूनिवर्सिटी के गेट पर व अंदर परिसर में शुक्रवार को बाकी दिनों जैसा माहौल व चहल-पहल नहीं दिखी। शुक्रवार को यूनिवर्सिटी परिसर के अंदर 1100 बैड के अस्पताल में ओपीडी सेवा भी बंद रही। हर दिन यहां लगभग 200 मरीजों की ओपीडी होती थी जिसके चलते काफी लोग यहां आते। इस दौरान गेट पर भी चहल-पहल दिखाई देती। शुक्रवार को इस तरह का नजारा यहां देखने को नहीं मिला। इसके अलावा पुलिस की चल रही कार्रवाई को लेकर अस्पताल में मरीजों को भर्ती करना भी अब बंद किया जा रहा है। साथ ही यहां भर्ती मरीजों को भी अब डिस्चार्ज किया जा रहा है।
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शुक्रवार को यूनिवर्सिटी परिसर के अंदर छात्रों की गतिविधियां भी बेहद कम देखने को मिली। रोज तो यहां के छात्र-छात्राएं कार में सवार होकर व पैदल ही यूनिवर्सिटी से अंदर-बाहर आते-जाते दिखाई देते। लेकिन शुक्रवार को इनकी चहल-पहल भी कम देखने को मिली। यूनिवर्सिटी के एक छात्र ने बताया कि यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द होने और एनएएसी के नोटिस को लेकर प्रबंधन ने छात्रों को सूचित किया है। इसे लेकर छात्रों में टेंशन का माहौल है। सभी ये सोच रहे हैं कि इसमें आगे क्या प्रक्रिया होगी और क्या इससे यूनिवर्सिटी भी बंद हो जाएगी। यदि ऐसा हुआ तो उनके भविष्य पर भी खतरा आ सकता है।
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वहीं बृहस्पतिवार शाम से चर्चा ये भी है कि यूनिवर्सिटी के कई प्रोफेसरों ने भी यहां आतंकी मॉड्यूल के सामने आने के बाद से इस्तीफे दे दिए हैं। इनकी संख्या लगभग 10 बताई जा रही है। ये सभी हिंदू समुदाय के प्रोफेसर बताए जा रहे हैं। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से अभी इस्तीफे मंजूर नहीं किए गए हैं। वहीं इस बारे में यूनिवर्सिटी प्रबंधन से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
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