बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहितेश ने बताया कि कोरोना के साथ समयपूर्व बच्ची का जन्म चुनौती था। वह एक साथ दो समस्याओं से जूझ रही थी। हालांकि बच्ची ने जिंदगी की सबसे मुश्किल लड़ाई को जन्म के साथ ही लड़ना शुरू कर दिया और 31 मई तक वह 1830 ग्राम की हो गई।
कोरोना संक्रमण को मात देने वालों में जिले की नवजात वीरा का नाम भी शामिल हो गया है। डॉक्टरों का दावा है कि देश में यह जन्म के साथ संक्रमण का पहला मामला है। गंभीर स्थिति में पहुंचने के बावजूद बच्ची ने एक माह में ही संक्रमण को पूरी तरह मात दे दी। बच्ची के साहस को देख परिजनों ने उसे ‘वीरा’ नाम दिया है।
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वह नोएडा निवासी हर्ष व अंकिता की पहली संतान है। अंकिता जब 31 सप्ताह गर्भवती थी तभी वह संक्रमित हो गई थी। अंकिता की हालत बिगड़ने लगी और स्थानीय अस्पतालों में उसे भर्ती नहीं किया गया। ऐसे में परिजन किसी तरह उसे सेक्टर-8 स्थित सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराने में सफल रहे। सर्वोदय अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील सिंगला ने बताया कि महिला की हालत गंभीर थी। ऐसे में तुंरत सिजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन के जरिए प्रसव) कराना पड़ा। इस समय गर्भस्थ शिशु केवल सात माह का था। जन्म के बाद बच्ची का वजह केवल 1290 ग्राम था। जन्म के साथ आरटीपीसीआर जांच की गई। अगले 24 घंटों में पुष्टि हुई कि बच्ची कोरोना संक्रमित है। नवजात के फेफडे़ सिकुड़ गए थे।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहितेश ने बताया कि कोरोना के साथ समयपूर्व बच्ची का जन्म चुनौती था। वह एक साथ दो समस्याओं से जूझ रही थी। हालांकि बच्ची ने जिंदगी की सबसे मुश्किल लड़ाई को जन्म के साथ ही लड़ना शुरू कर दिया और 31 मई तक वह 1830 ग्राम की हो गई। उसने न सिर्फ संक्रमण को मात दी बल्कि जिंदगी की जंग जीतकर परिजनों को वीरा नाम रखने पर मजबूर कर दिया। वीरा की मां अंकिता ने बताया कि उसने जन्म के बाद बच्ची के महज दो मिनट के लिए देखा और एक माह बाद बच्ची को गोद में लिया। इस दौरान मां बेटी दोनों वेंटिलेटर पर रहे।