माइक्रो-मैनेजमेंट मॉडल से हर वार्ड की अलग से निगरानी और जवाबदेही तय होगी
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर लगातार उठ रहे सवालों और बाहरी इलाकों में बढ़ती गंदगी की शिकायतों के बीच नगर निगम ने अब वार्ड स्तर पर नई रणनीति लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। तिगांव जोन के वार्ड-28, 34, 38 और 44 की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए निगम ने 2.35 करोड़ रुपये की विशेष परियोजना तैयार की है। इस योजना के तहत केवल कूड़ा उठाने तक सीमित सफाई व्यवस्था की बजाय सड़क, नाले, खाली प्लॉटों के किनारे और सार्वजनिक स्थलों की समग्र सफाई पर जोर दिया जाएगा।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार तिगांव क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आबादी बढ़ने वाले इलाकों में शामिल रहा है। नई कॉलोनियों और बढ़ते ट्रैफिक दबाव के कारण यहां सफाई व्यवस्था लगातार चुनौती बनी हुई थी। बरसात के दौरान नालों में गाद जमा होने और सड़क किनारों पर कूड़े के ढेर लगने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इसी को देखते हुए निगम ने माइक्रो-मैनेजमेंट मॉडल अपनाने का फैसला लिया है ताकि हर वार्ड की अलग से निगरानी और जवाबदेही तय हो सके।
परियोजना के तहत राइट ऑफ वे मॉडल लागू किया जाएगा। यानी सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक सफाई सुनिश्चित करनी होगी। इसमें मुख्य सड़कें, सर्विस रोड, नालियां, ग्रीन बेल्ट किनारे और सार्वजनिक स्थान शामिल होंगे। अधिकारियों का कहना है कि पहले कई जगह केवल मुख्य सड़क पर झाड़ू लगाकर सफाई पूरी मान ली जाती थी लेकिन अब पूरे क्षेत्र की स्थिति के आधार पर भुगतान और मूल्यांकन होगा।
डिजिटल निगरानी से होगी जवाबदेही तय
नई व्यवस्था में सफाई कार्यों की निगरानी पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म से करने की तैयारी है। निगम ने फर्जी हाजिरी, वाहनों की मनमानी और अधूरी सफाई की शिकायतों को रोकने के लिए कई तकनीकी प्रावधान जोड़े हैं। सभी सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति बायोमेट्रिक प्रणाली के जरिए सीधे एसडब्ल्यूएम पोर्टल पर दर्ज होगी। सफाई कार्य में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों में जीपीएस सिस्टम अनिवार्य रहेगा। निगम कंट्रोल रूम से वाहनों की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके अलावा सफाई से पहले और बाद की जियो-टैग और टाइम-स्टैम्प तस्वीरें भी पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे कागजों में सफाई दिखाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और वास्तविक स्थिति की निगरानी आसान होगी।
हर वार्ड में अलग सफाई दस्ता
परियोजना के तहत प्रत्येक वार्ड में कम से कम 50 सफाई कर्मचारियों की तैनाती करनी होगी। इसके अलावा एक जेसीबी और तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली हर वार्ड के लिए अनिवार्य रखी गई हैं। नालों की डी-सिल्टिंग, सड़क किनारे झाड़ियों की सफाई और लावारिस पशुओं से फैलने वाली गंदगी हटाने का काम भी दैनिक जिम्मेदारी में शामिल रहेगा। सफाई कर्मियों को पीपीई किट, दस्ताने, वर्दी, झाड़ू, बेलचा और अन्य उपकरण उपलब्ध कराना संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी होगी। निगम अधिकारियों का कहना है कि पहले कई क्षेत्रों में पर्याप्त उपकरण नहीं होने से सफाई प्रभावित होती थी।
जनता भी करेगी काम का ऑडिट
इस बार परियोजना में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी जोड़ी गई है। प्रत्येक वार्ड में निगरानी कमेटी बनाई जाएगी जिसकी अध्यक्षता संबंधित पार्षद करेंगे। सफाई निरीक्षक सदस्य सचिव होंगे जबकि स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक प्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। जन शिकायतों के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। सुबह छह बजे से रात दस बजे तक शिकायतें दर्ज की जा सकेंगी। निगम का दावा है कि शिकायतों के निस्तारण की समयसीमा भी तय की जाएगी।
बरसात से पहले सफाई पर फोकस
नगर निगम सूत्रों के अनुसार मई और जून में नालों की सफाई पर विशेष फोकस रहेगा क्योंकि मानसून के दौरान तिगांव, सेक्टर-75, पल्ला और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की समस्या सामने आती रही है। कई बार नालों में सिल्ट और कूड़ा जमा होने से पानी सड़कों पर भर जाता है जिससे ट्रैफिक और स्थानीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले समय में दूसरे जोन में भी इसी तर्ज पर वार्ड आधारित सफाई परियोजनाएं लागू की जा सकती हैं।
शहर को स्वच्छ बनाने के लिए हर स्तर पर काम किया जा रहा है, इसके लिए कई बड़ी व छोटी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। - धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त