वेबसाइट पर गलत मान्यता दिखाने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दिल्ली धमाके के मामले में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर डॉ. उमर का नाम सामने आने के बाद से हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। इसी कड़ी में बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एनएएसी ने आरोप लगाया है कि यूनिवर्सिटी ने अपनी वेबसाइट पर झूठी जानकारी देकर आमजन, अभिभावकों और छात्रों को गुमराह किया है।
एनएएसी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि यूनिवर्सिटी ने यह दर्शाया कि उसे परिषद से मान्यता प्राप्त है, जबकि वास्तविकता यह है कि उसकी मान्यता की अवधि कई वर्ष पहले समाप्त हो चुकी है। परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है कि क्यों उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई न की जाए और क्यों उसे भविष्य के मूल्यांकन से अयोग्य घोषित न किया जाए।
मान्यता की अवधि खत्म होने के बाद भी दिखाई सक्रिय
एनएएसी के अनुसार, अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी को 23 मार्च 2013 से 22 मार्च 2018 तक 4 में से 3.08 सीजीपीए के साथ ग्रेड ए मान्यता प्राप्त थी। इसी तरह, अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग के अंतर्गत आने वाले टीचर एजुकेशन विभाग को 27 मार्च 2011 से 26 मार्च 2016 तक एनएएसी की मान्यता मिली थी। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने दोबारा प्रत्यायन के लिए आवेदन नहीं किया, लेकिन वेबसाइट पर पुरानी मान्यता को सक्रिय दिखाकर लोगों को गुमराह किया।
वेबसाइट बंद, एआईयू ने सदस्यता भी रद्द की
मामला सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी की वेबसाइट प्रशासन की ओर से बंद कर दी गई है। वहीं, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) ने भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी है।
राज्य सरकार से मिली थी विश्वविद्यालय की मान्यता
गौरतलब है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी की स्थापना हरियाणा विधानसभा की ओर से पारित विशेष अधिनियम के तहत की गई थी। वर्ष 2014 में प्रदेश सरकार ने इसे विश्वविद्यालय का दर्जा दिया और 2015 में इसे यूजीसी अधिनियम की धारा 2 (एफ) के तहत मान्यता प्राप्त हुई, जिससे इसे डिग्री प्रदान करने का कानूनी अधिकार मिला। फिलहाल एनएएसी ने यूजीसी और मानव संसाधन मंत्रालय से भी यूनिवर्सिटी की मान्यता वापस लेने की सिफारिश करने की चेतावनी दी है।