पाकिस्तानी हैंडलर ने ही उसे मेवात समेत अन्य ठिकानों पर छुपने को कहा
हैंडलर के कहने पर ही डॉ. उमर ने विस्फोटक इकट्ठा किया
इस कार्य में पाकिस्तानी हैंडलर ने कई लोगों के जरिये डॉ. उमर की मदद करवाई
फतेहपुर तगा से विस्फोटक की बड़ी खेप बरामद होते ही पाकिस्तानी हैंडलर ने तुरंत दिल्ली में धमाका करने का दिया था ऑर्डर
सोनू यादव
फरीदाबाद। अल-फलाह यूनिवर्सिटी परिसर से 30 अक्तूबर को जम्मू कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने डॉ. मुज्जमिल अहमद गनेई उर्फ मुसैब को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के दौरान दिल्ली में आई 20 कार से बम धमाका करने वाला डॉ. उमर भी यूनिवर्सिटी परिसर में ही मौजूद था। आधिकारिक सूत्र ने बताया कि पुलिस डॉ. मुज्जमिल को गिरफ्तार कर यहां से ले गई और उसके कुछ देर बाद ही डॉ. उमर भी यहां से भाग गया था।
बीते लगभग 2-3 महीनों से ब्लॉक नंबर 17 के कमरा नंबर 13 में रहने वाले डॉ. मुज्जमिल और अपना कमरा छोड़कर इसी कमरे में अधिकतर समय बिताने वाले डॉ. उमर को पाकिस्तानी हैंडलर से हिदायतें मिल रहीं थीं। इन दोनों में सीनियर डॉ. मुज्जमिल था तो उसकी अधिक बात पाकिस्तानी हैंडलर से होती थी। जांच एजेंसी के आधिकारिक सूत्र ने बताया कि डॉ. मुज्जमिल के गिरफ्तार होने के तुरंत बाद यहां से भागे डॉ. उमर ने पाकिस्तानी हैंडलर को ये अपडेट दी।
पाकिस्तानी हैंडलर ने डॉ. उमर को कहा कि तुम यहां से जल्दी निकलो। पाकिस्तानी हैंडलर ने उमर को मेवात समेत आस-पास के इलाके में छुपने के ठिकाने बताए। इस दौरान पाकिस्तानी हैंडलर ने ही डॉ. उमर की मदद के लिए अन्य लोगों को भी काम पर लगाया। कुछ दिन तक इन्हें छुपकर रहने की हिदायत पाकिस्तानी हैंडलर की ओर से दी गई।
इसके बाद 8 नवंबर को जम्मू कश्मीर व फरीदाबाद पुलिस की संयुक्त टीम एक बार फिर अल-फलाह यूनिवर्सिटी परिसर पहुंची। यहां पुलिस को डॉ. शाहीन की वो स्विफ्ट कार मिली जिसे डॉ. मुज्जमिल प्रयोग कर रहा था। इसी कार की तलाशी ली गई और राइफल, पिस्टल, मैगजीन व गोलियां बरामद की गई। ये कार्रवाई कई घंटे तक चली तो यूनिवर्सिटी परिसर में मौजूद लोगों व स्टॉफ ने ये देखा। ये सूचना डॉ. उमर तक पहुंची कि पुलिस फिर से यूनिवर्सिटी परिसर आ गई और स्विफ्ट कार से हथियार बरामद किए गए हैं।
डॉ. उमर ने ये अपडेट पाकिस्तानी हैंडलर को दी कि पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है और अब अवैध हथियार भी बरामद किए गए हैं। आधिकारिक सूत्र ने बताया कि इसी समय पर इन्हें लगा कि फरीदाबाद में यूनिवर्सिटी के आस-पास जो विस्फोटक छुपाया गया है, उस तक भी पुलिस जल्द पहुंच सकती है। ऐसे में इतने दिनों की प्लॉनिंग फेल हो जाएगी। तभी पाकिस्तानी हैंडलर ने डॉ. उमर व अन्य लोगों का संपर्क आपस में कराया और फिर दो दिन बाद ही दिल्ली में बम धमाका करा दिया गया।