- परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया
- ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पथरी का ऑपरेशन कराने का आया था मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सोमवार को पथरी के ऑपरेशन के दौरान लेजर मशीन बंद होने से मरीज का ऑपरेशन बीच में ही रोक दिया गया। इससे उसकी जान जोखिम में पड़ गई। इसे लेकर मंगलवार को परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया। फिलहाल मरीज सामान्य वार्ड में भर्ती है। जल्द उसका दोबारा ऑपरेशन किया जाएगा।
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल प्रबंधन ईएसआई में विश्वस्तरीय सुविधाओं का दावा करता है। सुविधाओं के नाम पर जर्मनी, यूरोप और सिंगापुर से मशीनें मंगाई गई हैं। जिससे बड़े से बड़ा ऑपरेशन बिना रक्त बहे आसानी से करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन मंगलवार को अस्पताल प्रबंधन के दावे फेल हो गए। सेक्टर-25 राजीव कॉलोनी निवासी 44 वर्षीय भंवर सिंह के भाई बजरंग ने बताया कि उनके भाई को काफी समय से किडनी में पथरी की शिकायत थी। कुछ दिन से दर्द काफी बढ़ गया। इसे लेकर शुक्रवार को वह एनआईटी 3 स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचे। यहां प्राथमिक जांच में पथरी 16-18 एमएम की पाई गई। इस दौरान डॉक्टरों ने उन्हें लेजर से ऑपरेशन कराने की सलाह दी और भर्ती कर लिया। मरीज के भाई बजरंग का आरोप है कि सोमवार को डॉक्टरों ने भाई को एनेस्थिसिया (बेहोशी की दवा) देने के बाद ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान अचानक लेजर मशीन बंद हो गई। इससे डॉक्टरों में अफरातफरी मच गई और आनन-फानन में ऑपरेशन को रोक दिया गया। आरोप है कि मरीज को पेशाब की नली लगाकर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इस संबंध में जब उन्होंने डॉक्टरों से बात की तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। पेशाब की नली से लगातार भाई को रक्त आ रहा है। डॉक्टर व अन्य स्टाफ कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। मंगलवार को डॉक्टरों ने फिर ऑपरेशन करने का आश्वासन दिया था कि लेकिन नहीं किया गया। उन्होंने जब डॉक्टरों से भाई को दूसरे अस्पताल में रेफर करने की बात की तो डॉक्टरों ने इनकार कर दिया। इसे लेकर लोगों ने मंगलवार को ऑपरेशन थियेटर के बाहर हंगामा किया, नारेबाजी की। एनआईटी 3 चौकी प्रभारी सोमपाल ने कहा कि मरीज के परिजनों को समझा हंगामा शांत करवा दिया गया है। परिजनों की तरफ से यदि लिखित शिकायत मिलती है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. असीम दास ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
रोजाना इलाज के लिए पहुंचते हैं 4500 मरीज
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से करीब साढ़े छह लाख कार्ड धारक (आईपी) जुड़े हुए हैं। इनमें से रोजाना ओपीडी में 4500 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में गेस्ट्रोइंट्रोलॉजी, किडनी रोग, ह्दय रोग, गायनी (स्त्री), न्यूरोलॉजी आदि विभागों में सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। जल्द ही किडनी ट्रांसप्लांट और न्यूरो लैब भी शुरू करने की तैयारी की गई है। बजरंग का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के नाम पर कोई खास सुविधाएं नहीं हैं। बेहतर डॉक्टरों का अभाव है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले
- 28 दिसंबर 2022 को डिलीवरी के दौरान डबुआ कॉलोनी निवासी अंजू मौर्या की मौत हुई।
- 15 जुलाई 2019 सड़क दुर्घटना के बाद भर्ती एक युवक की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि मरीज को गलत इंजेक्शन लगाया गया था, जिससे उसके मुंह से अचानक झाग आने लगे। इसके बाद उसकी मौत हो गई।