फरीदाबाद। मातृ भाषा हिंदी के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। चाहे सरकारी विभाग हो या अंग्रेजी माध्यम के स्कूल। अब सभी जगहों पर हिंदी को प्राथमिकता मिल रही है। अधिकारियों का भी मानना है कि जब उन्हें किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का ख्याल मन में आता था तो अंग्रेजी हमेशा आड़े आती थी। लेकिन, अपनी जड़ों से जुड़े रहे। वैकल्पिक भाषा को सिर्फ विकल्प के रूप में रखा। मातृ भाषा हमारी जड़ में है, हम इससे जुड़ें रहेंगे तो हमारी नींव कभी कमजोर नहीं होगी। यही वजह है कि आज सरकारी विभागों में आम लोगों से जुड़ने के लिए संवाद के साथ पत्राचार भी ज्यादा से ज्यादा हिंदी में किया जाता है।
संस्कृति और धरोहर को कायम रखने में योगदान दें
उपायुक्त जितेंद्र कुमार ने कहा कि पहले सरकारी कामकाज में ज्यादातर अंग्रेजी का ही प्रयोग होता था, लेकिन अब हिंदी में होने लगे है। इसके अलावा दफ्तर से घर पहुंचकर बच्चों से हिंदी भाषा में ही बात करता हूं। कोशिश रहती है कि घर पर मातृ भाषा का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करूं। शिक्षा बेशक अंग्रेजी में हो, लेकिन संस्कार तो हिंदी से ही मिलते हैं। हिंदी हमारी मातृभाषा है। इसको कभी भी भूलना नहीं चाहिए। कार्यालय में भी लोगों से हिंदी में बातचीत करने के लिए प्रेरित करता हूं। सभी प्रकार की नोटिंग हिंदी में की जाती है। लोग हिंदी लिखें, हिंदी बोलें और बच्चों को भी हिंदी के प्रति जागरूक करें। अपनी संस्कृति और धरोहर को कायम रखने में योगदान दें।
हिंदी की पुस्तक पढ़नी चाहिए
बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता नरेश कक्कड़ ने कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल बढ़ने के साथ हिंदी के शब्दों का प्रचलन बढ़ रहा है। राष्ट्र भाषा हिंदी को बढ़ावा देने के लिए युवा इस मंच पर बातचीत के लिए हिंदी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। विभाग में ज्यादातर कार्य अंग्रेजी में होते हैं लेकिन प्रयास रहता है कि हिंदी में कामकाज को बढ़ावा दिया जाए। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को अपनी रुचि की कोई हिंदी की पुस्तक पढ़नी चाहिए।
हिंदी हमारे लिए गर्व की बात
नगर निगम के संयुक्त आयुक्त प्रशांत अटकान ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा ही नहीं बल्कि हम सभी देशवासियों का मान-सम्मान और पहचान है। हिंदी का इस्तेमाल लोगों को ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए, क्योंकि यह हम लोगों के लिए गर्व और गौरव की बात है। मैं यह नहीं कहता कि हिंदी भाषा के अलावा अन्य भाषा का ज्ञान नहीं होना चाहिए। युवा पीढ़ी में भी इसके प्रति जागरूकता होनी चाहिए। सरकारी स्तर पर हिंदी में कार्यों पर जोर है।