कोरोना जांच के लिए स्थापित होगी मॉलिक्यूलर लैब
फरीदाबाद। कोरोना संक्रमण की जांच के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग मॉलिक्यूलर लैब स्थापित करने की तैयारी में है। इसके लिए बीके सिविल अस्पताल और सेक्टर-55 स्थित पॉली क्लिनिक में जगह तलाशी जा रही है। इस लैब में रियल टाइम पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (आरटीपीसीआर) मशीन से संक्रमण फैलाने वाले कोरोना वायरस व अन्य कई वायरसों के कारण होने वाली बीमारियों का समय से पता लगाया जा सकेगा। पहले जांच के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर जिले के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में यह ठोस कदम है। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में पहले ही इस लैब की स्थापना की जा चुकी है।
मुख्य चिकित्सक डॉ. रणदीप पुनिया ने बताया कि टेस्टिंग प्रक्रिया को तेज करने के लिए स्वास्थ्य निदेशालय ने रियल टाइम पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (आरटीपीसीआर) मशीन लगाने की मंजूरी दी है। जिला स्वास्थ्य विभाग को पंचकूला से टेस्ट मशीन भेजी जा चुकी है। सेक्टर-55 स्थित स्वास्थ्य विभाग के पॉली क्लीनिक में इसे रखा गया है। फिलहाल बीके में लैब स्थापना की संभावनाएं देखी जा रही हैं। यदि लैब सेटअप के लिहाज से जगह संतोषजनक नहीं लगी, तो सेक्टर-55 स्थित पॉली क्लिनिक में यह लैब स्थापित की जाएगी।
चार दिन चलेगी स्टाफ की ट्रेनिंग
लैब स्थापना से पूर्व बायोलॉजिस्ट व लैब सहायक स्टाफ की ट्रेनिंग की प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो जाएगी। ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (टीएचएसटीआई) में स्टाफ सोमवार से चार दिन की ट्रेनिंग पर रहेगा। ट्रेनिंग पूरी होते ही जांच के लिए लैब स्थापना का प्रोसेस भी जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
क्या है मॉलिक्यूलर लैब
बीके अस्पताल स्थित आईडीएसपी लैब के इंचार्ज व माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. एसएस दहिया ने बताया कि मॉलिक्यूलर लैब वायरोलॉजी लैब का ही एक हिस्सा है। मॉलिक्यूलर लैब में वायरल बीमारियों की जांच कर सही डायग्नोस किया जा सकेगा। पैथोजन यानी बैक्टीरिया, फंगस, माइक्रोप्लाजमा की भी जांच संभव होगी। इस लैब में वैक्सीन निर्माण का काम भी सरल होगा। मौजूदा समय में लैब को कोविड-19 डेडिकेटेड ही रखा जाएगा। भविष्य में इसका स्वास्थ्य लाभ मिलेगा। रैपिड एंटीजन टेस्ट के जरिए जिले के 16 स्थानीय सामुदायिक व प्राथमिक केंद्रों पर जांच जारी है। रैपिड जांच से एक घंटे के अंदर मरीज में संक्रमण की पुष्टि हो जाती है, लेकिन कई बार संक्रमण के लक्षण ग्रस्त मरीज की जांच नेगेटिव आती है। ऐसे में संदिग्धों की आरटीपीसीआर मशीन से जांच की जाती है। इस मशीन से जांच का परिणाम सौ फीसदी सही आंका जाता है।