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मकानों पर ताला जड़ गांव खाली कर गए कई लोग

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फरीदाबाद। दिल्ली और हरियाणा के फरीदाबाद बार्डर पर वन क्षेत्र और नगर निगम की जमीन पर बसे खोरी गांव में भारी तोड़फोड़ की जाएगी। इसके लिए नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी है। बिजली निगम की ओर गांव को जाने वाली बिजली की सप्लाई बंद कर दी गई है। पेयजल आपूर्ति बंद करने के साथ ही प्राइवेट टैंकरों के गांव में जाने पर भी रोक लगा दी गई है। ऐसे में परेशान होकर लोग घरों को खाली करने लगे है। बुधवार को क्षेत्र में कई घरों ताले लटके देखने को मिले। पूरे दिन लोगों द्वारा घरों का सामान ले जाने का सिलसिला चलता रहा।
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नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार खोरी गांव में 125 एकड़ जमीन है। जिसमें से 80 एकड़ जमीन पर कब्जा किया हुआ है। इसे खाली कराया जाएगा। नगर निगम प्रशासन ने मुनादी करवाकर लोगों को अपने मकान खुद हटाने के आदेश दिए हैं। इसके लिए बकायदा नोटिस भी लगा दिए गए हैं। लोगों की सुविधा के लिए निगम की ओर से चार ट्रक भी दिए गए हैं। लोग निशुल्क इनकी सहायता ले सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के गांव में तोड़फोड़ के आदेश को एक सप्ताह बीतने के बावजूद अभी भी भारी संख्या में लोग गांव मौजूद रहे हैं। प्रशासन लोगों से घर खाली करवाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहा है। इसी कड़ी में बिजली-पानी की सप्लाई पूरी तरह रोक दी गई है।
गांव के प्रवेश द्वार पर पुलिस का पहरा लगा दिया दिया है, जिससे कोई प्राइवेट टैंकर गांव में पानी की सप्लाई न दे सके। हालांकि दिल्ली से प्रवेश के रास्ते अभी खुले हैं। इसके साथ ही पुलिस की ओर से टैंकर चालकों को सख्त आदेश दिए गए है कि यदि पानी की सप्लाई कि तो उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। गांव में बिजली-पानी बंद होने से लोगों की परेशानियां बढ़ गई है। इससे लोग घरों को खाली करके दूसरी जगह जाने लगे है। वहीं कई लोग ऐसे है कि जिन्होंने 15 से 20 दिन का पानी पहले ही टंकियों में स्टोर करके रखा हुआ है। घर खाली करके जा रहे लोगों ने बताया कि कोरोना में पिछले डेढ़ साल से खाली बैठे है। अब आशियाना भी सरकार छीन रही है। ऐसे में उन्हें घर छोड़कर जाना पड़ रहा है। दिल्ली व आसपास के इलाकों में खोरी में तोड़फोड़ की बात का सभी मौके का फायदा उठा रहे हैं। एक सप्ताह पहले तक जो कमरा तीन हजार रुपये में मिल रहा। उसके दोगुने दाम वसूले जा रहे है। चार हजार की जगह सात हजार। इससे अब मरना-जीना बराबर हो गया है।
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तीन किलोमीटर पर भर कर ला रहे पानी
गांव में बिजली की सप्लाई बंद होने से लोगों को इतना फर्क नहीं पड़ा। जितना की पानी की सप्लाई बंद करने से पड़ा है। ऐसे में मजबूरन लोग गांव की सीमा से लगते दिल्ली क्षेत्र से पानी भर के ला रहे है। पानी के लिए लोगों को तीन-तीन किलोमीटर जाना पड़ रहा है। लोगों ने बताया कि पानी की समस्या के कारण वह कई दिनों से नहाये नहीं हैं। पीने के लिए बोतल खरीदकर काम चला रहे हैं। बिजली न होने से बाहर बैठकर काम चला रहे हैं। लोगों का आरोप है कि दिल्ली से महंगे दाम पर बिजली ले रहे थे। वह भी प्रशासन ने कटवा दी।
10 हजार घरों में छाया अंधेरा
प्रशासन के आदेश पर तोड़फोड़ से पहले गांव खोरी में बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है। इससे गांव के करीब 10 हजार मकानों में अंधेरा छा गया है। हालत यह है कि लोगों को अपने मोबाइल आदि चार्ज करने के लिए दिल्ली सीमा में जाना पड़ रहा है। बिजली न होने से गर्मी से लोगों का बुरा हाल है।
वर्जन
मेहनत मजदूरी कर एक-एक पैसा जोड़ कर किसी तरह घर बनाए है। अब उन्हें तोड़ा जा रहा है। ऐसे में अब वह कहां जाएं। ये उन्हें समझ नहीं आ रहा। - मरियम, स्थानीय निवासी
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आठ साल पहले प्रॉपर्टी डीलर से करीब डेढ़ लाख रुपये में जमीन खरीदी थी। किसी तरह मेहनत मजदूरी करके बच्चों का पेट पाल रहे हैं। अब उनके आशियाने को उजाड़ने की तैयारी चल रही है। तोड़फोड़ से पहले प्रशासन को उन्हें दूसरी स्थान पर रहने की जगह देनी चाहिए। - जमिला, स्थानीय निवासी
दूसरी जगह मकान बहुत महंगे मिल रहे हैं। कोरोना महामारी में नौकरी पहले ही जा चुकी है। अब आशियाना जाने का डर से नींद उड़ गई है। बच्चों रातभर सो नहीं पाते। दिन में अधिकारी धमकाते हैं। - अश्मानी, स्थानीय निवासी
यहां की कई गलियों को हमने खुद बनवाया है। जब मकान बन रहे थे। प्रशासन को तभी रोकने चाहिए था। भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई करने की जगह लोगों को परेशान किया जा रहा है। - रविंदर प्रसाद, स्थानीय निवासी
खोरी में तोड़फोड़ से पहले घरों को खारी करने के लिए नगर निगम की ओर से मुनादी का काम जारी है। लोगों को घर खाली करने के लिए ट्रक की सुविधा दी गई है, जो सूरजकुंड थाने के पास खड़े है। इसके अलावा बिजली कनेक्शन काट दिए गए है। पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है। प्रशासन की तरफ से तोड़फोड़ की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है, कभी तोड़फोड़ शुरू की जा सकती है। - डॉ. गरिमा मित्तल, नगर निगम आयुक्त
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