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Faridabad News: 20 फुट नीचे दबे मैनहोल, पांच साल से बंद पड़ी सीवर लाइन

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सीवर लाइन ज्यादा नीचे होने के कारण मैटल डिटेक्टर भी नहीं हो रहा कामयाब
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अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी के दावों के बीच सेक्टर-29 से बाईपास तक बनी आधुनिक सड़क अब प्रशासन के लिए बड़ी तकनीकी चुनौती बन गई है। करीब पांच साल पहले तैयार हुई इस स्मार्ट रोड के नीचे डाली गई सीवर लाइन आज तक चालू नहीं हो सकी है।
निर्माण के दौरान मैनहोल जमीन से करीब 20 फुट नीचे दब गए और उनकी सटीक लोकेशन दर्ज नहीं की गई। अब इन्हें खोजने और लाइन को चालू करने के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च किया जा रहा है। वहीं सीवर लाइन ज्यादा नीचे होने के कारण मेटल डिटेक्टर भी फेल हो रहे हैं। कर्मचारियों को लाइन में उतरकर आगे की लाइन ढूंढनी पड़ रही है। यह परियोजना स्मार्ट सिटी की तरफ से विकसित की गई थी। उस समय सड़क को आधुनिक लाइटिंग, चौड़े फुटपाथ, अंडरग्राउंड केबलिंग और बेहतर ड्रेनेज सिस्टम से लैस करने का दावा किया गया था लेकिन भूमिगत सीवर ढांचे की तकनीकी मैपिंग में चूक अब सामने आ रही है। मैनहोल ढक जाने के कारण लाइन का उपयोग शुरू ही नहीं हो पाया।
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मामला तब फिर से चर्चा में आया जब एफएमडीए ने बरसात से पहले सेक्टर-21 से एत्मादपुर तक बने बड़े पुलना नाले की सफाई की योजना बनाई। इस नाले के साथ अंग्रेजों के समय का पुराना जलनिकासी मार्ग भी गुजरता है जो आज भी शहर के बड़े हिस्से का बरसाती पानी निकालने का प्रमुख जरिया है। योजना यह है कि अतिरिक्त वर्षा जल को नई सीवर लाइन से जोड़ा जाए ताकि मानसून में जलभराव कम किया जा सके। लेकिन जब तकनीकी टीम ने लाइन को सक्रिय करने की प्रक्रिया शुरू की तो पाया कि मैनहोल की सटीक पहचान ही उपलब्ध नहीं है। नतीजतन सड़क काटकर खुदाई करके सीवर लाइन ढूंढनी पड़ रही है।

यातायात और कारोबार प्रभावित

पिछले कुछ दिनों से सेक्टर-29 और बाईपास से जुड़े हिस्सों में खुदाई कार्य चल रहा है। सड़क किनारे मशीनों और बैरिकेडिंग के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है। यह मार्ग रोजाना हजारों वाहनों की आवाजाही का मुख्य रास्ता है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पहले ही ट्रैफिक दबाव अधिक है, ऊपर से खुदाई के कारण ग्राहकों की आवाजाही कम हो रही है। सेक्टर-29 मार्केट के दुकानदारों का कहना है कि हर मानसून में सड़क और आसपास के इलाकों में जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। बारिश के दौरान कई बार दुकानों में पानी घुस जाता है। जब स्मार्ट रोड बनी थी तब उम्मीद थी कि जलनिकासी व्यवस्था मजबूत होगी लेकिन अब तक इसका लाभ नहीं मिला।

नहीं की गई भूमिगत ढांचे की डिजिटल मैपिंग और जियो-टैगिंग


जानकारी के अनुसार, शहर में औसतन 450 से 500 मिमी तक वार्षिक वर्षा दर्ज की जाती है, जिसमें से अधिकांश बारिश जुलाई और अगस्त में होती है। बीते तीन वर्षों में भारी बारिश के दौरान सेक्टर-21, 22, 29 और बाईपास से जुड़े क्षेत्रों में कई बार घुटनों तक पानी भरने की स्थिति बनी। प्रशासन ने तब अस्थायी पंपिंग और नालों की सफाई से राहत देने की कोशिश की लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई सीवर लाइन को समय रहते चालू कर दिया जाता तो जलभराव की तीव्रता काफी कम हो सकती थी। शहरी परियोजनाओं में भूमिगत ढांचे की डिजिटल मैपिंग और जियो-टैगिंग अनिवार्य मानी जाती है। यदि निर्माण के समय जीआईएस आधारित रिकॉर्ड तैयार किया गया होता तो आज मेनहोल खोजने के लिए सड़क नहीं काटनी पड़ती।


समन्वय की कमी बनी कारण

अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट सिटी की परियोजनाओं में अक्सर अलग-अलग एजेंसियां काम करती हैं। यदि परियोजना के दौरान एकीकृत निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन नहीं हो तो भविष्य में रखरखाव मुश्किल हो जाता है। यहां भी निर्माण के बाद संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं की गई जिसका खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है। शहर में पिछले एक दशक में स्मार्ट सिटी और शहरी विकास परियोजनाओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद कई परियोजनाएं समय पर उपयोग में नहीं आ पातीं। इस मामले में भी सड़क तो तैयार है सीवर लाइन बिछी है लेकिन पांच साल से उपयोग शून्य है। अब इसे चालू करने के लिए अतिरिक्त राशि खर्च की जा रही है जिससे सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं।
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बरसात से पहले काम पूरा करना चुनौती

सूत्रों का कहना है कि बरसात से पहले नाले की सफाई और सीवर लाइन को जोड़ने का काम प्राथमिकता पर है। यदि यह कार्य तय समयसीमा में पूरा हो जाता है तो सेक्टर-21 से एत्मादपुर तक जलभराव की समस्या में काफी राहत मिल सकती है। फिलहाल तकनीकी टीम मैनहोल की सही पहचान और पाइपलाइन की स्थिति का आकलन कर रही है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि 20 फुट गहराई तक दबे ढांचे को सुरक्षित तरीके से बाहर लाया जाए और सड़क को कम से कम नुकसान पहुंचे। यदि काम में और देरी हुई तो आगामी मानसून में स्थिति फिर गंभीर हो सकती है।
वर्जन


सीवर लाइन को चालू करने का काम किया जा रहा है। जल्द इसे शुरू कर दिया जाएगा। - समुद्र सिंह, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए
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