व्यापारियों का कहना है कि थोक मंडियों और मैन्युफैक्चरिंग हब से ही माल महंगा आ रहा है
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का असर अब फरीदाबाद के बाजारों में भी साफ दिखने लगा है। जिले के मुख्य बाजारों एनआईटी-1, नंबर-5, ओल्ड फरीदाबाद और बल्लभगढ़ में रोजमर्रा के सामान से लेकर कंगन और झुमकों के दाम भी बढ़ गए हैं। महंगाई ने न केवल ग्राहकों की जेब पर बोझ डाला है, बल्कि दुकानदारों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
कपड़ों की चमक हुई फीकी
कपड़ा बाजार में कीमतों में आए उछाल ने व्यापारियों की परेशानी बढ़ा दी है। एनआईटी मार्केट के कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि थोक मंडियों और मैन्युफैक्चरिंग हब से ही माल महंगा आ रहा है। पीछे से ही हर ड्रेस और थान के कपड़े पर 5 से 8 प्रतिशत की तेजी आई है। मजबूरी में हमें भी दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं, लेकिन ऊंचे दामों के कारण ग्राहकों का आना कम हो रहा है।
आर्टिफिशियल ज्वेलरी के भी बढ़े दाम
महंगाई की मार सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं है। महिलाओं के पसंदीदा आर्टिफिशियल झुमके, कान की बालियां और कंगन की दुकानों पर भी रेट में आठ से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दुकानदारों के मुताबिक, कच्चे माल की सप्लाई चेन प्रभावित होने और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने से छोटे आइटम भी महंगे हो गए हैं।
रेट बढ़ने के कारण टर्नओवर गिर रहा है। सिर्फ हालात सुधरने का इंतजार कर सकते हैं।-श्रवण, दुकानदार
ऐसा लग रहा है कि गैस और पेट्रोल के बाद सबसे ज्यादा असर कपड़ों पर ही पड़ा है। -राजेश कुमार, दुकानदार
लोवर-टीशर्ट खरीदने आया था, जो लोवर पहले 150 रुपये में मिलती थी, वह अब 170 से 180 रुपये में मिल रही है।-अंबेश, खरीदार
कंगन, झुमके और बालियों की छोटी सी दुकान लगाकर गुजारा करते हैं। सर्दियों के बाद अब लग रहा था कि महंगाई बढ़ने से बिक्री और कम हो गई है।-दीपक, दुकानदार