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आईसीयू के मरीजों को इमरजेंसी कक्ष में रख बचा रहे जान

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फरीदाबाद। कोरोना संक्रमण के कारण जिले में ऐसे हालात हो चुके हैं कि न तो निजी अस्पतालों में आरक्षित बेड बचे हैं और न ही समय पर टेस्ट रिपोर्ट मिल रही है। ऐसे में जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर कोरोना की दूसरी लहर हावी होती नजर आ रही है। कई निजी अस्पताल हाई प्रोफाइल मामले में भी मजबूरी बताकर बेड देने से इंकार कर रहे हैं। दूसरी ओर संक्रमण का रौद्र रूप इतना हो गया है कि जिले में कोरोना जांच की रिपोर्ट भी समय पर नहीं मिल रही है। ऐसे में मरीजों को सही समय पर न तो संक्रमण की जानकारी मिल पा रही है और न ही इलाज।
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मरीज आए तो कहां भर्ती करें, समझ नहीं आता
फोर्टिस अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं दे रहे डॉ. कुलराज बताते हैं कि वार्ड के लिए 50 बेड हैं, आईसीयू में 10 बेड हैं। सांस फूलते हुए मरीज को इमरजेंसी में भर्ती करना पड़ रहा है। हर दिन करीब 20 ऐसे मरीज आ रहे हैं जो बेड के इंतजार में घंटों अस्पताल की इमरजेंसी में रोके जा रहे हैं। यह वह मरीज हैं जो इमरजेंसी में सांस की दिक्कत के साथ आते हैं। इन्हें नली के जरिये ऑक्सीजन देते हैं। बिस्तर होते तो आईसीयू देते हैं, नहीं होते तो अरेंज करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि यह काफी मुश्किल हो गया है कि मरीजों को बेड समय पर मिले। कई प्रयास के बाद जब यह संभव नहीं हो पाता तो इमरजेंसी में ही मरीजों को भर्ती कर रहे हैं। कई मरीज ऐसे होते हैं जो आईसीयू में हैं, लेकिन हालात संभल नहीं कर पा रहे। ऐसे मरीजों को इलाज के लिए हर मिनट निगरानी की जरूरत है।
हर दिन कई स्वास्थ्य कमी हो रहे संक्रमित, स्टाफ हो रहा कम
इमरजेंसी के बाहर मरीजों की लाइन लगने लगी हैं। वहीं, इन मरीजों की जांच व उपचार में लगे स्वास्थ्य कर्मी हर दिन पॉजिटिव हो रहे हैं। हालात यह हैं कि रैपिड और आरटीपीआर जांच में मरीज निगेटिव होते हैं। एक्सरे-सिटी स्कैन में कोविड आ रहा है। मात्र 24 घंटे में मरीज खतरे के निशान पर होता है। मरीज जल्दी खतरे के निशान पर पहुंच रहे हैं। इमरजेंसी मरीजों को भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। व्हीलचेयर पर भी मरीज इमरजेंसी में आने के लिए इंतजार कर रहे हैं। मौजूदा समय में एक बेड पर तीन की वेटिंग चल रही है। हालात खराब हैं। बड़े-बड़े अस्पतालों में किल्लत है। अहमदाबाद में रेमिडिसिविर के लिए दो किलोमीटर तक लाइन लगी। शायद यही हालात यहां भी हो सकते हैं। यह मेडिसिन मॉडरेट, सिवियर (गंभीर व अति गंभीर) मरीजों के लिए जरूरी मानी जा रही है। अन्य के लिए इसका कोई फायदा नहीं। हेल्थकेयर सिस्टम मरीजों के बोझ से कॉलेप्स होने की हालत में पहुंच चुका है। मौजूदा समय में अस्पताल में भर्ती करने वाले मरीजों को दाखिल करने की जरूरत देखते हुए ही उन्हें अस्पताल में लिया जा रहा है। केवल उनको ही भर्ती कर रहे हैं। होम आइसोलेशन पर मैनेज होने वाले मरीजों को दाखिल नहीं कर रहे।
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अस्पताल आइसोलेशन वार्ड आईसीयू वेटिंलेटर
ईएसआईसी 500 40 23
अल-फला 125 05 02
पार्क 25 15 05
क्यूआरजी सेंट्रल 22 11 04
फोर्टिस 41 12 04
एशियन 70 36 07
सर्वोदय 60 15 05
क्यूआरजी 100 20 10
मेट्रो 45 16 07
अस्पताल ईएसआईसी और अलफला में बेड खाली हैं। वहीं, निजी अस्पतालों में और बेड आरक्षित करने की कोशिश रहेगी। स्वास्थ्य सेवाओं को संभालने के लिए पूरा प्रयास जारी है।
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-डॉ. रणदीप सिंह पुनिया, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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