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Faridabad News: राजकीय स्कूल की छात्राओं में बढ़ाई जाएगी नेतृत्व क्षमता

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पढ़ाई छोड़ने का मन बना चुकी छात्रों की पहचान कर दिलाएंगी दाखिला
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। राजकीय स्कूलों में पढ़ाई के साथ नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने के लिए ''बालिका मंच'' को दोबारा शुरू किया जाएगा। इसके तहत पढ़ाई छोड़ने का मन बना चुकी छात्रों की पहचान कर उन्हें अगले सत्र में दोबारा से दाखिला दिलाया जाएगा। इसके साथ ही स्कूलों में बंद पड़ी शिकायत पेटीकाओं को खोलने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में विभाग की ओर से दिशानिर्देश जारी कर दिया गया है।
राजकीय स्कूलों में पढ़ाई में वालीतेज तर्रार और नेतृत्व क्षमता वाली छात्राओं को पहचान कर उनके नेतृत्व में बालिका मंच स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। जो स्कूल के आस पास जाकर छात्राएं पढ़ाई छोड़ चुकी या छोड़ने का मन बना रही छात्राओं की पहचान कर उन्हों दोबारा से स्कूल में दाखिला दिलाने का प्रयास करेंगी। बालिका मंच की छात्राएं उन छात्राओं के परिजनों से भी बात करेंगी। शिक्षकों के अनुसार कई बार बच्चे शिक्षक को खुलकर स्कूल छोड़ने की वजह नहीं बता पाती हैं, लेकिन वह अपने दोस्त या सामान्य आयुवर्ग से अपनी बात शेयर कर सकती हैं। इसी सोच के साथ बालिका मंच दोबारा गठित किए जाने का निर्णय लिया गया है। बालिका मंच में 5 से 10 छात्राओं को शामिल किया जाएगा। पहले की तरह ही स्कूल में कक्षा 6ठी से 8वीं और नौ से 12वीं कक्षा के लिए अलग-अलग मंच बनाए जाएंगे। प्रत्येक महीने के तीसरे शनिवार को स्कूलों में दो घंटे का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न विषयों पर छात्राओं को बोलने का भी अवसर दिया जाएगा।
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क्या है बालिका मंच

स्कूलों में बालिका मंच बनाया गया था, जहां लड़कियों की संख्या अधिक थी। बालिका मंच किशोर छात्राओं का ऐसा मंच था जिसकी संरचना बालिकाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। इस कार्यक्रम को लेकर स्कूल मुखिया की भी भूमिका बनाई गई है। इसके तहत छात्राओं की सामाजिक समस्याओं को समाधान किया जा सके। यदि समस्या माता-पिता या अभिभावक स्तर की है तो उन्हें बुलाकर उसका समाधान किया जाए।
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बालिका मंच को दोबारा शुरू किया जा सकता है। इसके माध्यम से स्कूली छात्रों में नेतृत्व क्षमता बढ़ाने और पढ़ाई छोड़ चुकी छात्राओं की पहचान कर स्कूल में दोबारा दाखिला दिलाना है। छात्रों को सामाजिक पहलुओं के प्रति जागरूक करना भी है।


आशा दहिया, जिला शिक्षा अधिकारी
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