ईएसआईसी अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज के कैंसर विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय सिंह राय ने बताया कि स्तन कैंसर की समस्या से ग्रसित अस्पताल में हर महीने करीब 30 से 35 महिलाएं इलाज के लिए पहुंचती हैं। इनमें प्रारंभिक युवावस्था वाले करीब 15 मरीज जो 20 से 45 साल के होते हैं। महिलाओं में स्तन कैंसर की समस्या जैनेटिक यानी माता पिता से मिलने वाली बीमारियां, धूम्रपान, बदलती जीवनशैली, एल्कोहल का सेवन, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी और देर से शादी करने से हो सकता है।
उन्होंने बताया कि महिलाओं में ईस्टोजन और प्रोजेस्ट्रोन दो प्रकार के हार्मोन होते हैं। जब महिलाएं गर्भवती होती हैं तो एस्ट्रोजन की मात्रा कम हो जाती है और प्रोजेस्ट्रोन की मात्रा ज्यादा रहती है। अगर महिलाओं में एस्ट्रोजन की मात्रा बढ़ती है तो उनके पीरियड सर्कल जल्दी शुरू हो जाते हैं और उनमें स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, अगर प्रोजेस्ट्रोन की मात्रा बढ़ती है तो स्तन कैंसर का खतरा कम होता है। 20 से 45 साल तक की महिलाओं में स्वस्थ स्तन होता है जिस कारण उन्हें स्तन में होने वाली गांठ की जानकारी बहुत कम मिलती है। इसकी जांच के लिए मैमोग्राफी की जगह अल्ट्रासाउंड काफी ज्यादा कारगर है। मैमोग्राफी कराने की औसत उम्र 40 साल होती है। स्तन कैंसर की बीमारी से बचने के लिए महिलाओं को 24 से 30 साल के अंदर शादी करनी चाहिए।
बीके अस्पताल के जनरल सर्जन ने बताया कि महिलाओं के स्तनों में गांठ की समस्या काफी अधिक देखी गई है। इनमें से कई महिलाओं में यही गांठ स्तन कैंसर का रूप ले लेती है। ऐसे में महिलाओं की मैमोग्राफी और स्टीरियोटैक्टिक से स्तन कैंसर की जांच करते हैं। अस्पताल में स्तन कैंसर की समस्या से ग्रसित महीने में करीब आठ से दस मरीज इलाज के लिए आते हैं। यह समस्या बच्चों को स्तनपान न कराना, शराब पीना, धूम्रपान करना, पारिवारिक इतिहास या आनुवंशिक उत्परिवर्तन होना और शारीरिक रूप से सक्रिय न होना से हो सकता है। इसके अलावा, अधिक उम्र, विरासत, वजन बढ़ने से भी हो सकता है।
बचाव
धूम्रपान न करना, जीवनशैली में बदलाव जैसे एक्सरसाइज करना, स्वस्थ आहार लेना, पारिवारिक इतिहास होने पर समय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और समय पर महिलाओं को शादी करने से स्तन कैंसर से बचा जा सकता है।