संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। डबुआ थाना क्षेत्र के गाजीपुर रोड स्थित नवोदय विद्या निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में मंगलवार को 11वीं की छात्रा ने तीसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। छात्रा सीए बनना चाहती थी। माता-पिता भी उसे सीए बनाने की तैयारी में जुटे थे।
जान्हवी कॉमर्स की छात्रा थी। वह दो भाईयों की बहन थी, जिसमें से एक भाई कॉलेज में पढ़ाई करता है। वहीं दूसरा छोटा भाई उसके साथ उसी स्कूल में पढ़ता है। पिता प्रमोद ने बताया कि उनकी बेटी ने कॉमर्स में दाखिला लिया था। वह पाली में परचून की दुकान चलाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि वह मूलरूप से यूपी, बुलंदशहर के रहने वाले हैं लेकिन करीब 40 सालों से वह यहां रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि बेटी का सीए बनने का सपना अधूरा रह गया। हरियाणा अभिभावक एकता मंच प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा कि अगर स्कूल के अंदर या स्कूल के बाहर कोई बच्चा कोई गलती करता है तो उसके लिए स्कूल के अध्यापक की ओर से बच्चों को सजा देने की बजाए उस बच्चे के परिजनों को बुलाकर बात करनी चाहिए।
कोट्स
स्कूलों में अनुशासन जरूरी है लेकिन अनुशासन के नाम पर ऐसी सजा नहीं दी जानी चाहिए, जिससे बच्चे की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो। शिक्षकों को बच्चों की उम्र, मानसिक स्थिति और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर व्यवहार करना चाहिए। -सतेन्द्र सौरोत, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य, राजकीय आदर्श संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर-55
कोट
बच्चों को किसी भी गलती पर शारीरिक या मानसिक दबाव देना उचित नहीं है। स्कूल में अनुशासन जरूरी है लेकिन इसके लिए बच्चों को डराने या लंबे समय तक खड़ा रखने जैसी सजा देने के बजाय समझाने और संवाद का तरीका अपनाना चाहिए। -डॉ अंकुर सचदेवा, मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल