होडल। हसनपुर बीडीपीओ कार्यालय में करोड़ों रुपये के घोटाले के खुलासे के बाद अब जांच एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी है। मंगलवार को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की चार सदस्यीय टीम ने तहसील कोषागार में ऑडिट शुरू किया। यह वही घोटाला है, जिसमें बीडीपीओ कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की ओर से सरकारी फंड का फर्जी तरीके से दुरुपयोग करते हुए करोड़ों रुपये की हेराफेरी का आरोप लगा था।
पिछले वर्ष चंडीगढ़ स्थित सीएजी टीम ने प्रदेश के विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा भेजे गए विकास फंड के उपयोग की जांच की थी। इस ऑडिट में सामने आया कि अधिकारियों की लॉगिन आईडी का दुरुपयोग कर वर्ष 2023-24 और 2024-25 में डीडीपीओ कार्यालय पलवल के माध्यम से करीब 56 करोड़ों रुपये से ज्यादा की राशि जारी की गई। इस राशि में से बीडीपीओ कार्यालय हसनपुर के माध्यम से दीपक मैनपावर नामक एक फर्जी फर्म को विकास कार्यों के नाम पर बड़ी रकम ट्रांसफर की गई, जबकि फर्म की कोई वैधता नहीं थी।
ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद डीडीपीओ उपमा अरोड़ा के निर्देश पर हरियाणा एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) ने कार्रवाई करते हुए मामले में शामिल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में बीडीपीओ कार्यालय का क्लर्क राकेश कुमार, तहसील खजाना कार्यालय का चपरासी सतपाल, पंचकूला निदेशक कार्यालय के रिटायर्ड अधिकारी शमशेर सिंह, होडल के सहायक खजाना अधिकारी विजेंद्र कुमार, एसडीओ कार्यालय का क्लर्क अनूप कुमार, बीडीपीओ कार्यालय का स्टेनो विवेक कुमार, कंप्यूटर ऑपरेटर गौतम कुमार, मैनपावर फर्म का मालिक दीपक कुमार और डीडीपीओ कार्यालय का क्लर्क तेजेंद्र शामिल हैं।
मंगलवार को कैग की चार सदस्यीय टीम तहसील खजाना कार्यालय पहुंची, जहां लघु सचिवालय में दस्तावेजों की जांच शुरू की गई। टीम में मुख्य खजाना अधिकारी संजय सिंह, रेवाड़ी के जिला खजाना अधिकारी सतीश कुमार यादव, सोनीपत के जिला खजाना अधिकारी संजीव कुमार ढिगड़ा और जूनियर प्रोग्रामर नवीन कुमार शामिल थे।
टीम ने तत्कालीन बीडीपीओ प्रवीण कुमार को बुलाकर उनका लिखित बयान दर्ज किया। अधिकारियों ने बताया कि वे अगले दस दिनों तक ऑडिट करके सभी संबंधित रिकॉर्ड की गहन जांच करेंगे और राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपेंगे।