पिता ने एससी/एसटी एक्ट, स्कूटी, सिम और आरोपी की मां की भूमिका पर उठाए थे सवाल, अदालत ने जांच को पर्याप्त माना
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। एक साल पहले मासूम विनय को छोड़ने के बदले पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। पिता महेंद्र की ओर से पुलिस जांच पर उठाए गए सवालों और आगे की जांच की मांग को अदालत ने खारिज कर दिया है।
पिता ने एससी/एसटी एक्ट की धाराएं नहीं लगाने, वारदात में इस्तेमाल स्कूटी और सिम की पर्याप्त जांच नहीं करने, वारदात वाले मकान को केस प्रॉपर्टी नहीं बनाने और आरोपी की मां की भूमिका की जांच नहीं करने पर सवाल उठाए थे। अदालत ने आवेदन पर सुनवाई करते हुए रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस की जांच को पर्याप्त माना। विनय 10 मार्च 2025 को घर से खेलने के लिए निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। अगले दिन 11 मार्च को सुबह करीब 9:30 बजे परिजनों ने पुलिस को उसके लापता होने की सूचना दी। इसके करीब डेढ़ घंटे बाद विनय के पिता महेंद्र के भाई अरुण के मोबाइल पर फोन आया। फोन करने वाले ने विनय को अपने कब्जे में होने की बात कहते हुए उसे छोड़ने के बदले पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी। साथ ही पुलिस को सूचना देने पर बच्चे को जान से मारने की धमकी दी गई।
इसी दौरान मांगर क्षेत्र में एक अज्ञात बच्चे का शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली। शव बीके अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया था। महेंद्र वहां पहुंचे और शव की पहचान अपने बेटे विनय के रूप में की। पुलिस ने मामले में 12 मार्च 2025 को अजीत सिंह उर्फ रिक्की और शादाब खान को गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। बेटे की हत्या के बाद महेंद्र ने अदालत में आगे की जांच के लिए आवेदन दिया। उन्होंने कहा कि विनय अनुसूचित जाति समुदाय से था, इसलिए मामले में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लगाई जानी चाहिए थीं। अदालत ने इस आपत्ति पर कहा कि शिकायत और आरोपियों के खुलासे वाले बयानों में ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि आरोपियों को विनय के अनुसूचित जाति समुदाय से होने की जानकारी थी। अदालत के अनुसार संबंधित प्रावधान लागू करने के लिए आरोपी को पीड़ित के एससी/एसटी समुदाय से होने की जानकारी होना जरूरी है।
मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी
स्कूटी को लेकर पिता ने सवाल उठाया था कि उसके मालिक को गवाह बनाने के बावजूद यह जांच क्यों नहीं की गई कि वारदात के समय स्कूटी किसके कब्जे में थी। अदालत ने रिकॉर्ड के आधार पर कहा कि शादाब ने पूरक बयान में बताया था कि उसने 9 मार्च 2025 को अपने दोस्त रोहित पंवार से मां की दवा लाने के बहाने स्कूटी ली थी। रोहित का बयान पुलिस ने दर्ज किया था। इसलिए स्कूटी मालिक को गवाह बनाए जाने को जांच में कमी नहीं माना गया। फिरौती की कॉल में इस्तेमाल सिम भी जांच के दायरे में था। सिम करण कोहली के नाम पर था। पिता ने उसके वास्तविक इस्तेमाल और कब्जे की पर्याप्त जांच नहीं होने की बात कही थी। अदालत ने पाया कि करण कोहली ने पुलिस को बताया था कि उसने अपना सिम अजीत सिंह को दिया था। अजीत के खुलासे में भी सिम करण से लेने की बात सामने आई थी। रिकॉर्ड में करण की वारदात में संलिप्तता का कोई तथ्य नहीं मिला। महेंद्र ने वारदात वाले मकान को केस प्रॉपर्टी के तौर पर जब्त नहीं करने और अजीत की मां की भूमिका की जांच नहीं करने पर भी सवाल उठाए थे। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी ने मकान का साइट प्लान तैयार किया था। वहीं आरोपी की मां की वारदात में संलिप्तता साबित करने वाला कोई तथ्य रिकॉर्ड पर नहीं मिला। मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को अभियोजन साक्ष्य के लिए होगी।