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Faridabad News: जिले का सिर्फ 13.77 प्रतिशत भूजल ही उत्तम श्रेणी में

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भूजल गुणवत्ता मानचित्र 2026 में सामने आई जानकारी, छह साल मे जुटाए आंकड़े
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22 जिलों से जुटाए 10,500 से अधिक नमूने

मोहित शुक्ला

फरीदाबाद। फरीदाबाद में बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और भूजल पर बढ़ती निर्भरता के बीच पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार और केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल के वैज्ञानिकों की छह साल की रिसर्च से तैयार प्रदेश के पहले ‘भूजल गुणवत्ता मानचित्र 2026 में जिले का केवल 13.77 फीसदी भूजल ही उत्तम श्रेणी में मिला है। बाकी 86.23 फीसदी भूजल किसी न किसी स्तर पर खारेपन, लवणता या सोडियम की समस्या से प्रभावित है। इसका असर केवल पानी तक सीमित नहीं है बल्कि लगातार ऐसे पानी से सिंचाई होने पर खेतों की मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होने का खतरा है।


वैज्ञानिकों ने प्रदेश के 22 जिलों में छह साल तक फील्ड सर्वे कर 10500 से अधिक मिट्टी और पानी के नमूने जुटाए। प्रयोगशालाओं में जांच के बाद तैयार किए गए मानचित्र में भूजल की गुणवत्ता को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। फरीदाबाद के आंकड़े बताते हैं कि जिले में अच्छी गुणवत्ता वाला भूजल सीमित क्षेत्र में ही रह गया है। यहां यमुना का पानी इस्तेमाल होता है यमुना के पानी में खनिज व तत्व जमीन में रह जाते हैं और पानी ऊपर आ जाता है इसलिए बचे हुए पानी में यह समस्या सामने आ रही है।
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39.92 फीसदी भूजल थोड़ा खारा

रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद में 39.92 फीसदी भूजल थोड़ा खारा श्रेणी में है। 15.39 फीसदी पानी खारा और 12.39 फीसदी पानी उच्च खारा है। इसके अलावा 22.99 फीसदी भूजल थोड़ा सोडियम युक्त, 5.66 फीसदी सोडियम युक्त और 2.93 फीसदी अत्यधिक सोडियम युक्त पाया गया है। केवल 13.77 फीसदी भूजल उत्तम श्रेणी में दर्ज किया गया है।

जल निकासी और भौतिक संरचना हो सकती है खराब
खारे और अधिक सोडियम वाले पानी से लगातार सिंचाई करने पर मिट्टी की संरचना बिगड़ सकती है। पानी में मौजूद अतिरिक्त लवण मिट्टी में जमा होने लगते हैं, जबकि अधिक सोडियम मिट्टी के कणों को प्रभावित कर उसकी जल निकासी और भौतिक संरचना खराब कर सकता है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर खेतों में सफेद परत यानी रेह दिखाई देने और जमीन की उत्पादकता घटने का खतरा बढ़ जाता है।


शहर के पानी की व्यवस्था पर भी बढ़ रहा दबाव

फरीदाबाद में भूजल केवल खेती के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। शहर की पेयजल व्यवस्था में भी भूजल की अहम भूमिका रही है। जिले में यमुना किनारे लगे 22 रेनीवेल से पानी की आपूर्ति होती है वहीं शहर में 1600 से करीब ट्यूबवेल है जिनसे पानी निकालकर पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री की ओर से भी भूजल आधारित पेयजल आपूर्ति में गुणवत्ता संबंधी दिक्कतों को देखते हुए अपर गंगा नहर से फरीदाबाद के लिए ताजा पानी लाने की संभावना तलाशने और 50 सामुदायिक केंद्रों व पार्कों में पहले चरण में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की घोषणा की थी।




वैज्ञानिक प्रबंधन से ही बच सकती है जमीन

वैज्ञानिकों ने खारे और अधिक सोडियम वाले पानी वाले क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता के हिसाब से खेती करने और मिट्टी सुधार के उपाय अपनाने की सलाह दी है। ऐसे क्षेत्रों में जिप्सम का प्रयोग, हरी खाद, जैविक खाद और टपक या फव्वारा सिंचाई जैसी तकनीक उपयोगी हो सकती हैं। खासकर किसानों के लिए यह जरूरी है कि सिंचाई से पहले पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और उसी के आधार पर फसल व मिट्टी प्रबंधन का फैसला लिया जाए।
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फरीदाबाद में यमुना का पानी जमीन में आ जाता है। इसी पानी को पेयजल के लिए खींचा जाता है। पानी में मौजूद नमक व अन्य तत्व वहीं जमीन में रह जाते हैं इसलिए जमीन में खनिज की मात्रा बढ़ रही है। फरीदाबाद के अधिकतर इलाके अरावली के तल पर बसे हैं इसलिए पानी भी खारा है। माइक्रो एसटीपी व अन्य योजनाओं पर काम हो रहा है। - सुधीर चौहान, विशेषज्ञ व पूर्व सीनियर टाउन प्लानर, नगर निगम गुरुग्राम
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