अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने अपहरण व हत्या मामले में आरोपी विजय उर्फ लाला की नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए अपने आदेश में अहम टिप्पणी की कि केवल गवाहों के बयान पूरे हो जाना जमानत का आधार नहीं बन सकता।
अदालत ने कहा कि आरोपी की आपराधिक प्रवृत्ति को देखते हुए जमानत दिए जाने पर समाज और कानून व्यवस्था पर प्रभाव पड़ने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी। एफआईआर के अनुसार 18 अप्रैल 2021 की रात आदेश मित्तल अपनी कार से घर लौट रहे थे। रास्ते में एक वाहन ने उनकी कार को रोक लिया, जिसके बाद उनका अपहरण कर लिया गया। अगले दिन गांव हीरापुर क्षेत्र से उनका शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पेट सहित अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर गंभीर चोटें पाई गईं, जिन्हें सामान्य रूप से मृत्यु के लिए पर्याप्त बताया गया। जांच के दौरान पुलिस ने 21 अप्रैल 2021 को आरोपी विजय उर्फ लाला को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने वारदात में शामिल होने की बात स्वीकार की। जांच में मृतक का मोबाइल फोन आरोपी से बरामद किया गया, वहीं वारदात में इस्तेमाल की गई गाड़ी चोरी की निकली।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल का नाम एफआईआर में नहीं था और वह लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है। साथ ही, शिकायतकर्ता सहित मुख्य गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, ऐसे में साक्ष्यों से छेड़छाड़ की कोई आशंका नहीं है। वहीं अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी पर अपहरण, हत्या और साजिश जैसे गंभीर आरोप हैं। इसके अलावा आरोपी आपराधिक प्रवृत्ति का है और उसके खिलाफ 15 अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।