फरीदाबाद। एलोपैथी उपचार को मरीजों की बिगड़ती हालत का जिम्मेदार बताने वाले बाबा रामदेव बयान के विरोध में बृहस्पतिवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से संबंधित डॉक्टरों ने दो घंटे ओपीडी सेवाएं बंद रखीं। संस्था की ओर से बाबा रामदेव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। बृहस्पतिवार को आईएमए ने प्रधानमंत्री के नाम का ज्ञापन उपायुक्त यशपाल यादव सौंपा।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जिला पदाधिकारियों और सदस्यों ने बुधवार को काली पट्टी बांधकर काम किया था। बृहस्पतिवार को विरोध के तौर पर डॉक्टरों ने सुबह 8 बजे से 10 बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद रखीं। इसी दौरान संस्था के कई पदाधिकारी बाबा रामदेव के खिलाफ कार्रवाई की मांग से जुड़ा ज्ञापन देने के लिए सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय पहुंचे। आईएमए प्रधान डॉ. पुनीता हसीजा, मीडिया प्रभारी डॉ. सुरेश अरोड़ा और वरिष्ठ उप प्रधान डॉ. अजय कपूर इस दौरान मौजूद रहे।
आईएमए प्रधान डॉ. पुनीता हसीजा ने बताया कि बाबा रामदेव पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग तरह के ब्यान देकर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को बेकार बता रहे हैं। उनका कहना है कि एलोपैथी के डॉक्टरों ने कोरेाना का इलाज करते समय लाखों लोगों को मार दिया। हजारों डॉक्टर वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी मर गए। डॉक्टर अपने आप को भी नहीं बचा सके तो दूसरे मरीजों का क्या इलाज करेंगे।
मीडिया प्रभारी डॉ. सुरेेश अरोड़ा ने कहा कि बाबा ने अध्यापक, इंजीनियर और पायलट तक का मजाक बना दिया है। ऐसे में हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि बाबा रामदेव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। हम आयुर्वेद के खिलाफ नहीं हैं। आयुर्वेद हमारे देश की एक प्राचीन व सम्मानीय पद्धति है। हमारा आयुर्वेद से कोई झगड़ा नहीं है, लेकिन हम बाबा रामदेव के कथनों से आहत हैं।
डॉ. अरोड़ा का कहना है कि इससे डॉक्टर पेशे से जुड़े लोगों को काफी ठेस पहुंची हैं। लगातार लोग डॉक्टर के मनोबल को तोड़ने वाले बयान दे रहे हैं। वहीं, वह कोरोना की जंग में सबसे पहले अपनी प्राणों को संकट में डालकर लोगों के इलाज में जुटे हुए हैं। कई ऐसे भी डॉक्टर हैं जो मरीजों का इलाज करते हुए संक्रमित हुए और उनकी मौत तक हुई। ऐसे डॉक्टर के परिजन अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।