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सूझबूझ से काम लेती पुलिस तो टल सकता था बवाल

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फरीदाबाद। बुधवार को खोरी गांव में हुए बवाल में पुलिस थोड़ा सूझबूझ से काम लेती तो बवाल बच सकता था। पिछले करीब बीस दिनों से पुलिस लगातार इस इलाके में फ्लैग मार्च कर रही थी। समय समय पर डीसीपी अंशुल सिंगला पुलिस अधिकारियों को दिशा निर्देश भी देती आ रही थी। इन सब तैयारियों के बावजूद बुधवार को मात्र आधे घंटे में ही पुलिस की तैयारियों की पोल खुल गई।
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खोरी गांव में महापंचायत का आह्वान दो दिन पहले से हो चुका था। ग्रामीणों ने इसके लिए बाकायदा पोस्टर भी छपवा दिए थे। पंचायत की जगह भी पहले से तय थी। इस सब के बावजूद पुलिस ने कार्यक्रम स्थल पर मात्र पचास से साठ पुलिस कर्मी ही तैनात किए थे। खोरी के निवासियों की संख्या के हिसाब से कुछ भी नही थे। गांव के लोग पूरी तैयारी के साथ आए थे। ज्यादातर के हाथ में पोस्टर थे। इनमें बिजली पानी की बहाली, जहां झुग्गी वहीं मकान जैसे स्लोगन लिखे हुए थे। रात भर ग्रामीणों ने इन्हें बनाया था, लेकिन पुलिस इनकी तैयारी को भांप नही सकी। महिला पुलिस की बात करें तो कार्यक्रम स्थल पर सीआरपीएफ की कुछ महिला पुलिस कर्मी ही मौजूद थी। बवाल से पहले पुलिस ने एक फ्लैग मार्च निकाला था। उसके बाद महिला पुलिस कर्मी यहां बैठ गई थी। हरियाणा पुलिस की महिला स्टाफ को गांव के बाहर बिठा रखा था, जबकि पंचायत अंदर होनी थी। प्रदर्शन करने वालों में महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा थी। सबसे आगे की पंक्ति में महिलाएं ही थी, नतीजा ये हुआ कि बवाल होने पर पुरुष पुलिस कर्मियों को महिलाओं पर लाठीचार्ज करना पड़ा। इससे मामला और बिगड़ गया।
पार्क से पहले भीड़ को रोकते तो घट सकती थी संख्या
पंचायत की सूचना के बाद दिल्ली की तरफ से आईटीबीपी के जवान अपना मोर्चा संभाले हुए थे। महरौली रोड को पर लोग न आ जाएं, इसके लिए रोड से तीन सौ मीटर से पहले ही जवानों की तैनाती कर दी गई थी। गांव के अंदर की जिम्मेदारी हरियाणा पुलिस की थी। कार्यक्रम स्थल का पहले से पता होने के बावजूद पुलिस ने पार्क से पहले जवानों की तैनाती नही की। यदि लोगों को कुछ मीटर पहले से ही रोकना शुरू कर देते तो भीड़ नही जुट पाती। पार्क के सामने गली चौड़ी हो जाने के कारण ज्यादा लोग एकत्रित हो गए और यही बवाल का कारण बना।
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नोडल ऑफिसर रही नदारद
पुलिस विभाग की तरफ से डीसीपी एनआईटी अंशुल सिंगला को नोडल ऑफिसर बनाया गया है। तोड़फोड़ की सूचना के बाद से ही डीसीपी की तरफ से पुलिस को लगातार दिशा निर्देश दिए जा रहे थे। जिसमें पुलिस को संयम बरतने की बात भी शामिल थी। फ्लैग मार्च के दौरान पुलिस को गांव की भौगोलिक स्थिति समझने का भी पूरा अवसर मिला था। बुधवार को किसान नेता के आने की सूचना के बाद भी डीसीपी मौके पर नही थी। व्यवस्था को संभालने के लिए एसीपी क्राइम अनिल यादव, एसीपी बड़खल सुखबीर व एसीपी तिगांव पृथ्वी सिंह को लगाया गया था। तीनों ही अधिकारी पुरानी खोरी गेट पर तैनात रहे।
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