पड़ताल: बस स्टैंड में यात्रियों के बैठने की न उचित व्यवस्था और न ही पीने का पानी ही उपलब्ध
चौराहे पर प्राइवेट बसों-ऑटो रिक्शा का जमावड़ा, महिलाओं के लिए शौचालय तक नहीं
गर्मी से बेहाल नजर आते हैं यात्री, पेड़ ही यात्रियों को उपलब्ध कराते हैं राहत की छांव
निशांत पटेल
पलवल। बढ़ते पारे के साथ गर्मी नित नए इम्तिहान ले रही है लेकिन बस अड्डे तपिश से निपटने के इंतजाम तक नहीं हैं। यहां यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त संख्या में सीट नहीं हैं और पीने के लिए पानी तक की व्यवस्था नहीं है। बस पकड़ने आए यात्रियों को धूप में खड़े रहना पड़ रहा है। इससे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को काफी दिक्कत हो रही है। एक दो पेड़ हैं जो राहत की छांव उपलब्ध करा रहे हैं। लेकिन उनकी छांव में भी सीमित ही यात्री आ सकते हैं। बस स्टेशन के आसपास गंदगी पसरी रहती है और चौराहे पर अतिक्रमण और ऑटों की आराजकता परेशान करती है। यात्रियों की मांग है कि बस स्टैंड पर शीघ्र ही छायादार शेड, पर्याप्त बैठने की व्यवस्था और पीने के लिए ठंडे पानी की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ट्रैफिक प्रबंधन के लिए भी सख्त कदम उठाए जाएं।
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प्राइवेट बसों और ऑटो रिक्शा की अराजकता
बस स्टैंड से सटे मुख्य चौराहे पर प्राइवेट बसों और ऑटो रिक्शा का जमावड़ा हमेशा बना रहता है, जिससे यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है। ट्रैफिक जाम आम बात हो गई है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
महिलाओं की परेशानी ज्यादा
बस स्टैंड पर महिलाओं के लिए जयादा समस्या है। यहां बैठने के लिए सीटें नहीं हैं और साफ-सुथरे शौचालय की भी कमी है। महिलाएं घंटों धूप में खड़े होकर बसों का इंतजार करती नजर आ जाती हैं। यहां न शेड हैं और न ही महिला प्रतीक्षालय। अगर आप के पास पैसे नहीं है तो प्यास ही रह जाएंगे क्योंकि यहां बोतलबंद पानी ही मिलता है। गर्मी और धूप के कारण कई बार यात्रियों की तबीयत भी बिगड़ जाती है।
यात्रियों ने कहा
1. थक जाते हैं, लेकिन बैठने को एक पटिया तक नहीं। हर दिन गर्मी में घंटों खड़ा रहना पड़ता है। बसें भी समय से नहीं आतीं, और स्टाफ से पूछो तो सीधा जवाब नहीं मिलता। - अंकित
2. हम बुजुर्ग हैं, हमें बैठने की जरूरत होती है। यहां बैठने के लिए बेंच तक नहीं है, सिर्फ धूप और धूल है। हर रोज यही हाल है। स्टाफ कोई जवाब नहीं देता, और बसें भी अक्सर देर से आती हैं। -भगवान दास
3. इतनी गर्मी में छोटे बच्चों के साथ खड़े रहना मुश्किल हो जाता है। महिलाओं के लिए तो कोई सुविधा ही नहीं है। बस शेड भी टूटा-फूटा है। कई बार तो खड़े-खड़े चक्कर आने लगते हैं। - मालती
4. न पानी है, न बैठने की जगह। प्रशासन बस वसूली में लगा है, सुविधा देने में नहीं। मजबूरी में घर से बोतल भरकर लाते हैं। - हरदेव
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यात्रियों की मांगें
1. बस स्टैंड पर ठोस शेड का निर्माण किया जाए ताकि लोग धूप से बच सकें।
2. बैठने की पर्याप्त व्यवस्था की जाए, खासकर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए।
3. ठंडे और साफ पीने के पानी की व्यवस्था हो।
4. महिलाओं के लिए अलग प्रतीक्षालय और साफ शौचालय बनाए जाएं।
5. ट्रैफिक की अव्यवस्था को ठीक करने के लिए ऑटो और प्राइवेट बसों के ठहराव को रेगुलेट किया जाए।
कोट
यात्रियों की समस्याओं को पूरी गंभीरता से ले रहे हैं। गर्मी को देखते हुए बस स्टैंड पर सुविधाएं बेहतर करने की दिशा में कार्य शुरू हो चुका है। बहुत जल्द यात्रियों के लिए शेड, बैठने की समुचित व्यवस्था, ठंडा पानी और महिलाओं के लिए अलग प्रतीक्षालय की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। - नवनीत कुमार, जीएम, पलवल