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Faridabad News: जीएसटी स्लैब में कटौती से बढ़ी खरीदारी, पर कलेक्शन पिछले साल से कम

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पिछले साल अगस्त तक 3600 करोड़ रुपये से अधिक था संग्रह, इस साल अब तक करीब 3500 करोड़ पहुंचा है
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गौरव मिश्रा

फरीदाबाद। वर्ष 2025 के अंत में जीएसटी स्लैब में की गई कटौती का असर जिले के जीएसटी कलेक्शन पर भी दिखाई देने लगा है। टैक्स की दरें कम होने से बाजार में खरीदारी बढ़ी है। हालांकि, पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अब तक जीएसटी कलेक्शन का आंकड़ा थोड़ा पीछे है।
वर्ष 2025 में अगस्त तक जिले से 3600 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी संग्रह हुआ था, जबकि इस वर्ष अब तक यह आंकड़ा करीब 3500 करोड़ रुपये तक पहुंचा है। जीएसटी अधिकारियों के अनुसार, स्लैब में कटौती के बाद जिले से हर महीने करीब 350 करोड़ रुपये का कलेक्शन करने का लक्ष्य रहता है। मौजूदा आंकड़ा इस लक्ष्य के हिसाब से बेहतर स्थिति में है। अधिकारियों का कहना है कि टैक्स की दरें कम होने से लोगों की खरीदारी बढ़ी है। इसके अलावा इस वर्ष उद्योगों और दुकानों के नए पंजीकरण भी पिछले साल के मुकाबले अधिक हुए हैं। इससे जीएसटी के दायरे में नए कारोबार आए हैं और राजस्व बढ़ने में मदद मिली है।
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अधिकारियों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में जिले से कुल 5686 करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन हुआ था। इसमें सबसे अधिक 2844 करोड़ रुपये आईजीएसटी से प्राप्त हुए। वहीं, एसजीएसटी से 1609 करोड़, सीजीएसटी से 1196 करोड़ और सेस से 37 करोड़ रुपये का संग्रह हुआ था। अधिकारियों को उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 में कलेक्शन पिछले वित्त वर्ष के आंकड़े को पार कर सकता है।

खरीदारी बढ़ने से कारोबार को मिला सहारा

उद्यमियों का कहना है कि जीएसटी दरों में कमी आने से कई वस्तुओं की कीमतों में राहत मिली है। इससे ग्राहकों की खरीदारी बढ़ी है और बाजार में मांग में सुधार हुआ है। कारोबारियों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में इसका सकारात्मक असर कारोबार और जीएसटी कलेक्शन दोनों पर दिखाई देगा।

बातचीत

जीएसटी की दरें कम होने से ग्राहकों को राहत मिली है। पहले कीमतों के कारण टलने वाली खरीदारी अब बढ़ी है। इसका सीधा फायदा बाजार के कारोबार को मिल रहा है। -श्याम सुंदर कपूर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया फोरम ऑफ एमएसएमई
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नए पंजीकरण और बढ़ती मांग से कारोबार का दायरा बढ़ रहा है। टैक्स व्यवस्था में राहत मिलने से छोटे और मध्यम उद्योगों को भी कारोबार बढ़ाने में मदद मिल रही है। -जितेंद्र शाह, अध्यक्ष सरूरपुर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
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