एक तरफ तो प्रदेश और केंद्र सरकार भूमिगत जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। प्रदेश में पानी की बर्बादी व फिजूलखर्ची पर निषेधाज्ञा लगाकर धारा 144 का प्रावधान किया गया है लेकिन पलवल में खुलेआम भूमिगत जल का दोहन किया जा रहा है। हाइवे किनारे बोरवेलों के माध्यम से पानी निकाला जा रहा है लेकिन अधिकारी सब कुछ जानकर भी अनजान हैं।
600 रुपए में बेचा जाता है एक टैंकर
भूमिगत जल का अवैध रूप से दोहन करने वाले लोग इस पानी को गांवों में ले जाकर 600 से 800 रुपए प्रति टैंकर के हिसाब से बेचते हैं। पानी के टैंकरों को गांव बघौला, दुधौला, पृथला, अगवानपुर व फिरोजपुर सहित हाइवे किनारे लगने वाले गांवों में बेचा जाता है। खास बात ये कि जिस पानी की सप्लाई की जाती है, वह पीने योग्य है भी या नहीं इसकी गुणवत्ता की जांच भी नहीं कराई जाती।
गंदा है पर धंधा है
हाइवे किनारे गांव फिरोजपुर में ही चार से पांच बोरवेल लगे हैं। इनमें से किसी के पास भी संबंधित विभाग से कोई लाइसेंस नहीं है। इन बोरवेलों से करीब 60-70 टैंकर पानी प्रतिदिन निकाला जाता है।
इससे जहां सरकार के राजस्व की चोरी होती है, वहीं इसे पीने वालों की सेहत से खिलवाड़ होता है। एक बोरवेल संचालक ने इस बात को स्वीकार किया ये बोरवेल गिरते भूजल स्तर की एक बड़ी वजह हैं पर करें क्या, गंदा है पर धंधा है।
भूजल के अवैध दोहन के कारण भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। जहां पहले जिले में अधिकांश स्थानों पर 25 फीट तक भूजल स्तर था। वह अब यमुना किनारे पर बढ़कर 35 से 40 फीसदी तक हो गया है। हाइवे के किनारे गांवों में तो स्थिति और भी विकराल है, कहीं-कहीं तो यह 100 फीट तक भी पहुंच चुका है। -डॉ. महावीर मलिक, कृषि विशेषज्ञ व पर्यावरणविद।
मामला संज्ञान में आया है। संबंधित विभागीय अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी। अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है तो कार्रवाई की जाएगी। सतबीर सिंह मान, एसडीएम, पलवल।