पार्किंग और बालकनी के नाम पर अलग से शुल्क तय किए जाने से लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ना तय
5 हजार से बढ़ाकर 5450 रुपये प्रति वर्ग फुट तय की गई कीमत
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में किफायती घर का सपना देख रहे हजारों परिवारों के लिए अब घर खरीदना पहले से महंगा हो गया है। हरियाणा सरकार ने अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी-2013 में संशोधन करते हुए फ्लैटों की अलॉटमेंट दरों में बढ़ोतरी कर दी है। नई अधिसूचना के अनुसार फरीदाबाद में अब अफोर्डेबल फ्लैट्स की कीमत 5 हजार से बढ़ाकर 5450 रुपये प्रति वर्ग फुट (कार्पेट एरिया) तय की गई है।
सरकार के इस फैसले का असर उन सभी प्रोजेक्ट्स पर पड़ेगा जहां अभी तक आवंटन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। इसके साथ ही पार्किंग और बालकनी के नाम पर अलग से शुल्क तय किए जाने से खरीदारों की कुल लागत में लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ना तय है।
नई नीति में सबसे बड़ा बदलाव पार्किंग को लेकर किया गया है। अब हर फ्लैट के साथ एक कार पार्किंग देना कॉलोनाइजर के लिए अनिवार्य होगा और इसके बदले खरीदार से फ्लैट की कुल कीमत का 10 प्रतिशत अतिरिक्त लिया जाएगा। अब तक अधिकतर अफोर्डेबल सोसायटियों में पार्किंग को लेकर विवाद और अव्यवस्था बनी रहती थी। सड़कों और कॉमन एरिया में वाहनों की पार्किंग से जाम और झगड़े आम थे। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से हर खरीदार को निर्धारित पार्किंग मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही यह समस्या कम होगी।
बालकनी भी अब मुफ्त नहीं, तय हुआ अलग चार्ज
संशोधित नियमों के तहत अब फ्लैट के साथ मिलने वाली बालकनी के लिए भी अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इसके लिए 1300 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर तय की गई है। हालांकि इसमें कुछ सीमा भी तय की गई है अधिकतम 100 वर्ग फुट तक ही चार्ज लागू होगा वहीं कुल वसूली 1.30 लाख रुपये से अधिक नहीं होगी
लंबित प्रोजेक्ट पर भी लागू होंगे नए नियम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नई दरें उन सभी प्रोजेक्ट्स पर लागू होंगी जहां अभी ड्रॉ या आवंटन नहीं हुआ है। ऐसे मामलों में बिल्डर संशोधित दरों के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे। यदि किसी प्रोजेक्ट में पहले से आवेदन लिए जा चुके हैं तो सफल आवेदकों से बढ़ी हुई राशि का अंतर वसूला जा सकेगा। हालांकि जो लोग नई कीमतों से सहमत नहीं हैं उन्हें बिना किसी कटौती के पूरा पैसा वापस लेने का विकल्प दिया गया है।
पुराने प्रोजेक्ट्स में भी बदलाव की गुंजाइश
जिन प्रोजेक्ट्स के बिल्डिंग प्लान पहले ही पास हो चुके हैं लेकिन पार्किंग की कमी है वहां बिल्डर दो-तिहाई आवंटियों की सहमति से प्लान में संशोधन कर सकेंगे। हालांकि जिन टावरों को ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) मिल चुका है वहां यह नियम लागू नहीं होगा।
मध्यमवर्ग पर सीधा असर, लेकिन सुविधाओं में सुधार की उम्मीद
फरीदाबाद में अफोर्डेबल हाउसिंग योजनाएं मुख्य रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए लाई गई थी। ऐसे में कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर इन वर्गों के बजट को प्रभावित करेगी। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि जहां एक ओर घर खरीदना मुश्किल होगा वहीं दूसरी ओर पार्किंग जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान होने से रहने की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है। लंबे समय से सोसाइटियों में पार्किंग को लेकर होने वाले विवादों पर इस फैसले से कुछ हद तक लगाम लगने की उम्मीद है।
यह बदलाव हेडऑफिस स्तर से होते हैं। जिला स्तर पर इसका कार्य जिला प्रशासन देखता है। - मनीष यादव, डीटीपी प्लानिंग