फरीदाबाद। साइबर थाना पुलिस की हिरासत में कथित रूप से हुई जुनैद (24) की हत्या मामले में पुलिस ने अभी तक क्या कार्रवाई की है। इसकी रिपोर्ट अल्पसंख्यक आयोग ने मांग ली है। आयोग के सचिव ने पुलिस आयुक्त को 15 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। पुलिस विभाग को लिखी चिट्ठी में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने कहा है कि इस घटना से अल्पसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। यह जिंदगी जीने के अधिकार का उल्लंघन है। वहीं साइबर थाना पुलिस के सभी अधिकारी व कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर यथास्थिति बने हुए हैं। हत्या जैसे गंभीर आरोप के बावजूद किसी को भी पद से नहीं हटाया गया है।
जुनैद की मौत के मामले में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। परिवार का आरोप है कि साइबर थाना प्रभारी बसंत कुमार, एसआई राजेश कुमार, एसआई सुरजीत, एएसआई नरेंद्र, एएसआई जावेद, नरेश हवलदार, दलबीर हवलदार के अलावा चार-पांच अन्य जवानों ने तीन गाड़ियों में सवार होकर जुनैद व उसके साथियों व भाइयों को सुनहेड़ा बॉर्डर से उठाया था। आरोप है कि उन्हें थर्ड डिग्री दी गई थी। परिवार का दावा है कि उन्होंने 70 हजार रुपये देकर जुनैद को पुलिस हिरासत से बचाया था। पुलिस की मार से उसकी हालत गंभीर थी। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। इधर फरीदाबाद पुलिस जुनैद के परिवार द्वारा लगाए आरोपों को नकार रही है। साइबर थाना प्रभारी बसंत कुमार का कहना है कि जुनैद की मौत थाने में नही हुई। उसे साइबर फ्रॉड के मामले में पूछताछ के लिए लाया गया था। जांच के बाद छोड़ दिया गया, जबकि उसके बाकी साथियों को जेल भेज दिया गया। मृतक की मौत अपने घर जाने के कई दिनों बाद हुई है।
यह था मामला
11 जून को पुन्हाना में जमालगढ़ में एक 24 वर्षीय युवक जुनैद की मौत हो गई। घटना के बाद गांव के लोगों ने पुलिस पर आरोप लगाकर आगजनी कर दी और पुलिस के वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। दो दिन बाद जुनैद की मां खतिजा की शिकायत पर बिछौर थाने में फरीदाबाद साइबर थाना प्रभारी बसंत कुमार, एसआई राजेश, एसआई सुरजीत, हेड कांस्टेबल नरेश व दलबीर, एएसआई नरेंद्र, जावेद व अन्य सहित करीब 12 लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हो गया।