जिले में लगातार बढ़ रहे कुत्ता और बंदरों के काटने के मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक बढ़ गया है। बीके अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 100 से अधिक मरीज रेबीज के इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचते हैं। 2025 में जनवरी से लेकर जुलाई तक 17 हजार से अधिक मरीज इंजेक्शन लगवा चुके हैं। कुत्ता, बंदर और बिल्ली के काटने के बाद रेबीज का इंजेक्शन लगवाना बेहद जरूरी है।
जिले में 4 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। वहीं बल्लभगढ़ सिविल अस्पताल में भी रेबीज के इंजेक्शन लगाए जाते है। अस्पताल में मात्र 100 रुपये में इंजेक्शन लगाया जाता है जबकि निजी अस्पतालों में इस इंजेक्शन की कीमत 400 रुपये से अधिक है।
7 माह में लगवाए गए इंजेक्शन
इस साल जनवरी में 2739, फरवरी में 2847, मार्च में 2556, अप्रैल में 2325, मई में 2504, जून में 2147 और जुलाई में 2300 लोगों ने रेबीज के इंजेक्शन लगवाए हैं।
एक मरीज को चार बार लगवाना पड़ता है इंजेक्शन
कुत्ता काटने के बाद उसी दिन, तीसरे दिन, सातवें दिन और 28वें दिन इंजेक्शन लगवाना आवश्यक है। मरीज को इन दिनों को ध्यान में रखते हुए इंजेक्शन लगवाने चाहिए । डॉक्टरों की मानें तो कुत्ते के काटने के तुरंत बाद रेबीज का इंजेक्शन लगवाना चाहिए। कुछ लोग झाड़ फूंक करवाते हैं ये बिलकुल गलत है।
वर्जन
अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शनों की कोई कमी नहीं है। पिछले साल के मुताबिक इस साल मामलों में वृद्धि हुई है। अगर किसी को कुत्ता या बंदर काट लेता है तो तुरंत उस जगह को साबुन से या पानी से अच्छी तरह से धोना चाहिए ताकि रेबीज के कीटाणु साफ हो जाएं। - एसएमओ डॉ. विकास गोयल