राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस
न्यायालय आवेदन मिलने के बाद एक हफ्ते के भीतर वकील नियुक्त कर देता है
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। हर वर्ष 9 नवंबर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य उन नागरिकों को न्याय के अधिकार से जोड़ना है जो आर्थिक, सामाजिक या शारीरिक रूप से कमजोर हैं और महंगी कानूनी प्रक्रियाओं का खर्च नहीं उठा सकते। संविधान के अनुच्छेद 39-ए के तहत ऐसे लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की गई है, ताकि हर व्यक्ति को समान न्याय का अधिकार मिल सके।
देशभर में कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सलाह और वकील की सुविधा दी जाती है। इसके तहत वरिष्ठ नागरिक, एसिड अटैक पीड़ित, दिव्यांग व्यक्ति, रेप पीड़िताएं, बाढ़ या प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोग तथा पुलिस हिरासत में बंद व्यक्ति शामिल हैं। इन वर्गों को अदालत में किसी भी मुकदमे, जमानत, या कानूनी प्रक्रिया के लिए मुफ्त में सरकारी वकील उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए व्यक्ति को आधार कार्ड और मामले के संबंधित तथ्य के साथ कोर्ट में आवेदन देना होता है। न्यायालय आवेदन मिलने के बाद एक हफ्ते के भीतर वकील नियुक्त कर देता है ताकि किसी भी व्यक्ति को कानूनी लड़ाई में देरी का सामना न करना पड़े।
संविधान हर नागरिक को समानता का अधिकार देता है
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पैनल के अधिवक्ता रविन्द्र गुप्ता ने बताया कि फरीदाबाद जिले में 14 मार्च 2024 को ‘कानूनी सहायता रक्षा प्रणाली’ की स्थापना की गई है। यह प्रणाली विशेष रूप से फौजदारी मामलों के लिए बनाई गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति, जिसे वकील करने में दिक्कत है, उसे समय पर योग्य कानूनी प्रतिनिधित्व मिल सके। भारत का संविधान हर नागरिक को समानता का अधिकार देता है। अनुच्छेद 39A में स्पष्ट कहा गया है कि राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि न्याय सभी को समान रूप से उपलब्ध हो और किसी को आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण न्याय से वंचित न होना पड़े। इसी प्रावधान के तहत देशभर में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण काम कर रहे हैं।
न्याय तक पहुंच हर नागरिक का संवैधानिक हक
रविन्द्र गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के अवसर पर जिले में कानूनी साक्षरता शिविर, सेमिनार, और जागरूकता रैलियां आयोजित की जाती हैं। इनका उद्देश्य आम लोगों को उनके अधिकारों की जानकारी देना और यह बताना है कि न्याय तक पहुंच केवल अमीरों का अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक का संवैधानिक हक है। फ्री लीगल एडवाइस का सबसे बड़ा लाभ महिलाओं, घरेलू हिंसा पीड़िताओं, और एसिड अटैक सर्वाइवर्स को मिला है। इन मामलों में वकील की फीस भारी पड़ती थी, जिससे कई महिलाएं न्याय तक नहीं पहुंच पाती थीं। अब सरकार द्वारा नियुक्त वकील उनके मामलों को नि: शुल्क लड़ते हैं।