तहसील कार्यालय में जांच कराने पर फर्जी निकले रजिस्ट्रेशन के दावे
आरोपी अधिवक्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। डबुआ थाना क्षेत्र में मकान की रजिस्ट्री कराने के नाम पर अधिवक्ता द्वारा 5.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई है। आरोप है कि अधिवक्ता ने स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, टीडीएस और रजिस्ट्री प्रक्रिया के खर्च के नाम पर रकम लेने के बाद फर्जी ई-चालान और टीडीएस स्लिप भेज दी।
तहसील कार्यालय में जांच कराने पर पता चला कि न तो रजिस्ट्रेशन फीस जमा हुई थी और न ही टीडीएस। पुलिस ने आरोपी अधिवक्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सैनिक कॉलोनी निवासी 73 वर्षीय रमेश चंद ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने सेक्टर-49 स्थित मकान की रजिस्ट्री कराने के लिए अधिवक्ता बिजेंद्र दत्त कौशिक से संपर्क किया था। अधिवक्ता ने रजिस्ट्री प्रक्रिया के लिए 4.20 लाख रुपये स्टाम्प ड्यूटी, 30 हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस, 60 हजार रुपये टीडीएस और 40 हजार रुपये अन्य खर्च के रूप में मांगे थे।
31 मई को रमेश चंद की पुत्री के खाते से 30 हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर जमा कराए गए। इसके बाद अधिवक्ता ने कथित ई-चालान भेजकर स्टाम्प ड्यूटी और टीडीएस की रकम भी अपने खाते में जमा करा ली। 23 जून को रजिस्ट्री प्रक्रिया के नाम पर 40 हजार रुपये और ले लिए गए। कुल 5.50 लाख रुपये लेने के बाद अधिवक्ता ने फोन उठाना बंद कर दिया और रजिस्ट्री कराने में टालमटोल करने लगा।
पीड़ित ने जब तहसील कार्यालय में जांच कराई तो पता चला कि रजिस्ट्रेशन फीस और टीडीएस जमा ही नहीं हुए थे। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अधिवक्ता द्वारा भेजे गए ई-चालान और टीडीएस स्लिप फर्जी थे। पुलिस जांच में भारतीय स्टेट बैंक से ई-चालान के जीआरएन नंबर और बैंक सीआईएन/रेफरेंस नंबर की जांच कराई गई। बैंक ने इन्हें अमान्य बताया। वहीं ई-ग्रास पोर्टल पर भी जीआरएन नंबर डालने पर कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि जांच के बाद अधिवक्ता बिजेंद्र दत्त कौशिक के खिलाफ बीएनएस की धाराओं के तहत 31 जुलाई को डबुआ थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।