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अरावली में तेंदुओं की गिनती की तैयारी में वन विभाग

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फरीदाबाद (कैलाश गठवाल)। जिले में कई जगह तेंदुए की मौजूदगी की घटना व अरावली पर्वत श्रंखला में पिछले दो महीनों के अंदर वन्य जीव संरक्षण विभाग के कर्मचारियों ने तेंदुए की मौजूदगी और बढ़ती हलचल को देखते हुए इनकी गिनती कराने का फैसला लिया है। विभाग द्वारा कराई जाने वाली यह गिनती फरवरी 2021 के अंत तक पूरी की जाएगी। इसके लिए हरियाणा सरकार वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून से संपर्क कर रही है। साल 2017 में किया गया सर्वे भी इसी देहरादून के इसी इंस्टीट्यूट द्वारा किया गया था।
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वर्ष 2000 से शुरू हुआ था गणना का काम
अरावली पर्वत श्रंखला का दायरा फरीदाबाद और गुरुग्राम में काफी बड़ा है। यहां वन्य जीवों की संख्या भी ज्यादा है। साल 2000 से शुरू हुई गणना में फरीदाबाद व गुरुग्राम इलाके की अरावली के अंदर केवल दो, तीन तेंदुए ही थे। पिछले 18 सालों में यह संख्या काफी बढ़ गई है। हरियाणा फॉरेस्ट ने अपने स्तर पर साल 2012 में सर्वे किया था। इसमें कर्मचारियों ने पैदल चलकर पंजों के निशान से जीवों की संख्या का अध्ययन किया था। उस समय की रिपोर्ट के अनुसार अरावली में कुल 8 तेंदुए होने की बात सामने आई थी। टीम ने तेंदुए के साथ-साथ, लोमड़ी, लकड़बग्घा, नीलगाय, जंगली कुत्ते, सियार आदि जीवों की संख्या में बारे में पता किया था।
2015 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को सौंपा गया जिम्मा
फॉरेस्ट विभाग के सर्वे के बाद 2015 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को अरावली में जीवों की सही स्थिति का पता लगाने का काम सौंपा गया था। इसमें इंस्टीट्यूट की टीमों ने अरावली के गुुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और मेवात से सटी पहाड़ियों में सर्वे किया। साल 2017 में फिर से जानवरों की गिनती की गई, जिसमे 31 तेंदुए, 4 लोमड़ी, 18 लक्कड़बग्गे सहित कई जानवर पाए गए।
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करीब चालीस लाख खर्च होने की है संभावना
विभाग के कर्मचारियों का मानना है कि जिस तरह से गुरुग्राम और फरीदाबाद में आबादी में तेंदुए की मौजूदगी के सबूत मिले हैं। इससे यह जाहिर होता है कि इनकी संख्या बढ़ चुकी है। इस बार अरावली में जानवरों की गिनती फरवरी 2021 में की जानी है। इस सर्वे के लिए सरकार की ओर से 40 लाख खर्च करने का अनुमान लगाया जा रहा है। अभी तक विभाग की तरफ से गांव मांगर, बंधवाड़ी, वजीराबाद, भोंडसी, घाटा, अनंगपुर में कुल 12 कैमरे भी लगाए गए। (संवाद)
कोट
मुख्यालय की ओर से तेंदुओं को बचाने और उनकी सुरक्षा के उपाय किए जा रहे हैं। विगत कुछ समय से देखा जा रहा है कि तेंदुओं की हलचल अरावली जंगलों के अलावा आसपास के गांवों में भी बढ़ गई है। इसलिए अब एक बार फिर से तेंदुओं की गिनती की योजना बनाई जा रही है। इस योजना पर करीब चालीस लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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- राजेंद्र प्रसाद, मंडल वन्य जीव संरक्षण अधिकारी।
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