पीड़ितों की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले में साइबर अपराधियों का जाल लगातार पैर पसार रहा है। ठगों ने किसी को कस्टमर केयर अधिकारी बनकर जाल में फंसाया, तो किसी का मोबाइल रिमोट पर लेकर बैंक खाता साफ कर दिया। वहीं, कुछ मामलों में परिचित बनकर और व्यापारिक सौदे के नाम पर फर्जी मैसेज भेजकर ठगी को अंजाम दिया गया।
साइबर थाना पुलिस ने सभी पीड़ितों की शिकायतों की जांच करने के बाद 17 मई को संबंधित धाराओं के तहत अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले मामले में बल्लभगढ़ के सेक्टर-3 निवासी अमित कुमार पलित ने तीन मई को अपने ऑनलाइन ऑर्डर को वापस करने के लिए इंटरनेट से कस्टमर केयर का नंबर ढूंढा। उस नंबर पर संपर्क करने पर ठग ने खुद को अधिकारी बताया और व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल कर एक लिंक भेजा। लिंक ओपन करते ही अमित के फोन में एपीके फाइल इंस्टॉल हो गई। इसके बाद ठगों ने अमित के बैंक खाते से 22 हजार रुपये और उनके पिता के खाते से 50 पचास हजार रुपये सहित कुल 72 हजार रुपये निकाल लिए।
दूसरे मामले में सेक्टर-62 निवासी गुलशन कुमार के साथ अजीबोगरीब तरीके से ठगी हुई। दो मई की दोपहर को उनका मोबाइल अचानक अपने आप अपडेट होने लगा। करीब 25 मिनट तक फोन ऑटो-अपडेट मोड पर रहा। इसके कुछ देर बाद ही गुलशन के पास एक मैसेज आया, जिसमें उनके बैंक खाते से बिना अनुमति के 97 हजार रुपये कटने की जानकारी थी।
तीसरे मामले में खेड़ी कलां निवासी विनोद कुमार को दो मई को एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को ग्राहक बताकर विनोद से ईंट खरीदने की बात कही। ठग ने विनोद को गुमराह करने के लिए एक फर्जी टेक्स्ट मैसेज भेजा, जिसमें 1.62 हजार रुपये की ट्रांजेक्शन सफल होने का नाटक किया गया था। इसके बाद ठग ने रोते हुए कहा कि उसका लड़का अस्पताल में भर्ती है और उससे गलती से ज्यादा पैसे ट्रांसफर हो गए हैं। विनोद उसकी बातों में आ गए और 2 व 3 मई को अलग-अलग बार में कुल 1,45,400 रुपये ठग द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड पर ट्रांसफर कर दिए।
इसी तरीके से सैनिक कॉलोनी सेक्टर-49 निवासी आरती ने पुलिस को बताया कि 24 मार्च को उनके पति के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आया। मैसेज करने वाले ने खुद को आरती की ननद बताया और कहा कि वह खरीदारी कर रही है, उसे पैसों की जरूरत है। झांसे में आकर पीड़ित परिवार ने ठग द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड पर अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से कुल 72,500 रुपये भेज दिए। बाद में बहन से बात करने पर ठगी का पता चला। ऐसे ही सेक्टर-55 निवासी हर्षित मनचंदा के बैंक खाते से 6 मई की रात को बिना किसी ओटीपी या जानकारी साझा किए अचानक दस हजार रुपये कट गए। हर्षित ने पुलिस को बताया कि उन्होंने किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी बैंक डिटेल या कोई लिंक शेयर नहीं किया था।