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Faridabad News: मुआवजे की मांग पर किसानों ने की महापंचायत

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किसानों ने कहा, जब तक वर्तमान बाजार भाव के अनुसार मुआवजा नहीं दिया जाता अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जमीन के मुआवजे और मालिकाना हक की मांग को लेकर धरना दे रहे किसानों ने गांव सोतई में मंगलवार को धरना स्थल पर महापंचायत का आयोजन किया। महापंचायत की अध्यक्षता किसान नेता रामराज भाटी ने की, जबकि मंच संचालन देवी सिंह लांबा ने किया। इसमें आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान, सरपंच, नंबरदार और गणमान्य लोग शामिल हुए। महिलाओं ने भी महापंचायत में भाग लिया।



महापंचायत में किसानों ने एकजुट होकर कहा कि जब तक उनकी भूमि का वर्तमान बाजार भाव के अनुसार मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। किसान नेताओं ने कहा कि उनकी मांग पूरी होने तक आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।
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महापंचायत में किसान नेता रतन सिंह सौरोत, महेंद्र चौहान, बबलू हुड्डा सहित अन्य नेता मौजूद रहे। पृथला विधायक रघुबीर सिंह तेवतिया, पूर्व विधायक नयनपाल रावत, ठाकुर राजाराम और रूपचंद लांबा ने भी महापंचायत में पहुंचकर किसानों को समर्थन दिया।



किसानों ने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से जबरदस्ती कार्रवाई की जाती है तो आसपास के गांवों के लोग किसानों के साथ खड़े रहेंगे और काम रोकने में हरसंभव सहयोग करेंगे। महापंचायत में मौजूद ग्रामीणों ने हाथ उठाकर आंदोलन को समर्थन देने और मुआवजा मिलने तक धरना जारी रखने का निर्णय लिया। किसानों ने कहा कि उनका संघर्ष शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा और प्रशासन से बातचीत के माध्यम से समाधान की उम्मीद है।
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1908 के रिकॉर्ड का दे रहे हवाला
किसान संघर्ष समिति सोतई के आजाद तेवतिया ने बताया कि वर्ष 1908 के राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित जमीन किसानों के नाम दर्ज है। किसानों के मुताबिक अधिग्रहण के बाद उनके नाम मुआवजे के चेक तैयार हुए थे, लेकिन निर्धारित समय पर भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद खड़ा हो गया। किसानों के अनुसार, वर्ष 2022 में डीआरओ ने नगर निगम से जमीन के मालिकाना हक को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। नगर निगम ने जमीन पर अपना दावा होने से इनकार किया। बाद में मामला अदालत पहुंचा और मुआवजे की रकम भी अदालत में जमा कराई गई। धरने पर बैठे किसानों ने कहा जब तक उन्हें मुआवजा नहीं मिल जाता, वह अपनी जमीन बिल्कुल नहीं छोड़ेगे।
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