बल्लभगढ़। गांव अलीपुर में सब्जी की फसल पर कीटनाशक दवा का छिड़काव करने के बाद किसान धर्मेंद्र (27) की तबियत बिगड़ गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि दवा छिड़काव करने के बाद धर्मेंद्र ने खाना भी खाया था। इसके बाद हालत गंभीर हो गई थी। सदर थाना पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है।
गांव अलीपुर निवासी ज्ञान सिंह ने बताया कि उसने खेती के लिए जमीन बटाई पर ली हुई है। इस समय खेत में सब्जी की फसल खड़ी है। बेटे धर्मेंद्र ने 20 जून को सब्जी की फसल में कीटनाशक दवाई का छिड़काव किया था। इस दौरान बेटे ने सावधानी नहीं बरती। दवाई का छिड़काव करने के बाद खाना खाने के लिए घर पर आया। खाना खाने के बाद पत्नी को बताया कि तबियत खराब हो रही है। उसे उपचार के लिए बीके अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां डॉक्टरों ने धर्मेंद्र की हालत गंभीर होने की वजह से उसको दिल्ली के सफदरजंग रेफर कर दिया। परिजन उपचार के लिए एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां धर्मेंद्र की 21 जून को मौत हो गई। जांच अधिकारी एसआई धर्मवीर ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है।
सबसे ज्यादा खतरनाक होती है लाल चिह्न की दवा
कृषि विभाग के इंस्पेक्टर डॉ. हरीश ने बताया कि कीटनाशक दवाइयां कई प्रकार की होती हैं। इन पर हरा, नीला, पीला और लाल रंग का चिह्न लगा रहता है। लाल चिह्न की दवा सबसे ज्यादा खतरनाक होती है। इसका प्रयोग करने के दौरान दस्ताने, मास्क समेत अन्य इंतजाम होने चाहिए। सिर पर कैप जरूर लगाएं। जूते पहनना अनिवार्य है। इसके अलावा दुकान से जो भी कीटनाशक दवा ली जाती है, उस बोतल पर सावधानी के बारे में स्पष्ट लिखा होता है। जिसे अवश्य पढ़ना चाहिए।
दोपहर में नहीं करना चाहिए छिड़काव
डॉ. हरीश ने बताया कि दोपहर के समय किसानों को फसलों में दवा का छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि दोपहर में कीट-पतंगें पत्तियों के नीचे या मिट्टी में छिप जाते हैं। ऐसे में दवाइयों का छिड़काव करने से उन पर दवाओं का कोई असर नहीं होता है। इसके अलावा हवा चलने के दौरान भी दवाइयों का छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि हवा के जरिए दवाइयां मुंह और सांस लेते वक्त शरीर के अंदर प्रवेश कर जाती हैं।
इन बातों का भी रखें ध्यान
- छिड़काव के बाद खेत में जानवर या किसी भी व्यक्ति को नहीं जाने देना चाहिए।
- किसान को खाना खाने के बाद छिड़काव करना चाहिए।
- पूरे कपड़े पहनने के बाद ही छिड़काव करें।
- छिड़काव के बाद कपड़े गर्म पानी में साबुन से धोएं।
- किसान को छिड़काव के बाद तुरंत नहाना चाहिए।
- स्प्रे करने के बाद बचे हुए कीटनाशक को कभी भी किसी तालाब, कुएं आदि में नहीं फेंकना चाहिए।
- खाली दवा की बोतल को किसी पत्थर से तोड़कर फेंक देना चाहिए।