'अगर अपनी भाभी को ले जा सकते हो, तो ले जाओ'
परिजनों के अनुसार सुमेश की पत्नी खुशबू 22 जून को दोपहर करीब 1 बजे गांव मोहना से पलवल बस स्टैंड के लिए निकली थी। उसने परिजनों को बताया था कि वह अपनी बुआ की बेटी के साथ अपने मायके नवादा, बिहार जा रही है, लेकिन अगले दिन 23 जून तक जब वह अपने मायके नहीं पहुंची, तो परिवार चिंतित हो गया। उसी दिन एक अनजान मोबाइल नंबर से मृतक की बहन आशा के सोशल मीडिया पर एक मैसेज आया, जिसमें लिखा गया कि तुम्हारी भाभी उनके पास है। इसके साथ ही उस व्यक्ति ने पैसों की मांग करते हुए एक स्कैनर कोड भेजा और बार-बार रिकॉर्डिंग के माध्यम से पैसे भेजने का दबाव बनाया। परिवार की ओर से पैसे देने से इनकार करने पर उन्हें धमकी दी गई कि अगर अपनी भाभी को ले जा सकते हो, तो ले जाओ। परिजनों ने लोकेशन पूछी, मगर जवाब नहीं मिला।
पति से थाने में हुई मारपीट
इसके बाद परिजन 23 जून को थाना छांयसा पहुंचे, लेकिन उनका आरोप है कि वहां पर पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज नहीं की। शिकायत न केवल नजरअंदाज की गई, बल्कि पीड़ित सुमेश को एक से डेढ़ घंटे तक थाने में बैठाकर पूछताछ की गई उसके फिंगरप्रिंट लिए गए, पैरों के निशान लिए गए और यहां तक कि उसके साथ मारपीट भी गई। मृतक के भाई सरताज का आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मियों ने 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
पंखे पर लटक कर कर ली आत्महत्या
मृतक के पिता धर्मवीर ने आरोप लगाया हैं कि पुलिस उनकी बहू की किडनैपिंग की शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे, तो पुलिस ने रिपोर्ट लिखने से साफ इनकार कर दिया। इन सब घटनाओं से मानसिक रूप से टूट चुके सुमेश ने अपने घर में पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस प्रवक्ता यशपाल का कहना है कि पुलिस ने आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज कर लिया है। इसमें एक अज्ञात व्यक्ति और बुआ के खिलाफ दर्ज किया गया है।