पांच साल की जॉर्डन में नौकरी
रमन ने बताया कि वह करीब पांच वर्षों तक जॉर्डन में एक एक्सपोर्ट कंपनी में कोऑर्डिनेटर के पद पर कार्यरत थे। वहां उन्हें लगभग 45 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। करीब तीन वर्ष पहले उसने प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सुनने शुरू किए, जिससे उसका आध्यात्मिक झुकाव बढ़ता गया। जब उसे महाराज के स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिली तो उसने नौकरी छोड़कर भारत लौटने और उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए दंडवत कांवड़ यात्रा करने का संकल्प लिया।
22 जुलाई से हरिद्वार से शुरू की यात्रा
रमन की यह यात्रा 22 जुलाई से हरिद्वार से शुरू हुई थी। पूरी यात्रा में उसके दो भाई और तीन दोस्त लगातार उसके साथ चल रहे हैं। वे रमन की सुरक्षा, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का ध्यान रख रहे हैं ताकि वह बिना किसी बाधा के अपनी यात्रा पूरी कर सके।
12 बार कर चुके सामान्य कांवड़ यात्रा
रमन ने बताया कि वह इससे पहले 12 बार सामान्य कांवड़ यात्रा कर चुका है, लेकिन दंडवत कांवड़ यात्रा पहली बार कर रहा है। उसका कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि उसकी अटूट श्रद्धा और गुरु के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
यूपी में हुई आसानी, फरीदाबाद में ट्रैफिक ने किया परेशान
यात्रा के अनुभव साझा करते हुए रमन ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पुलिस और प्रशासन की ओर से बेहतर व्यवस्था मिली, जिससे यात्रा सुगम रही। हालांकि फरीदाबाद में भारी ट्रैफिक के कारण उसे आगे बढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उसका उत्साह और विश्वास अडिग है। रमन का कहना है कि उसे विश्वास है कि उसकी यह तपस्या सफल होगी और वह जल्द ही वृंदावन पहुंचकर अपने संकल्प को पूरा करेगा।