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Faridabad News: 115 करोड़ की केंद्रीय ग्रांट गंवाई, स्वच्छता में फरीदाबाद फिर फेल

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स्मार्ट सिटी बनने के दावे के मोर्चे पर लगातार पिछड़ रहा, हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने निगम से किया जवाब तलब
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15वें वित्त आयोग के तहत मिलनी थी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट ग्रांट

राहुल राज
फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी बनने का दावा करने वाला फरीदाबाद स्वच्छता के मोर्चे पर लगातार पिछड़ता जा रहा है। नगर निगम की लापरवाही के कारण केंद्र सरकार की 15वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली 115 करोड़ रुपये की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (एसडब्ल्यूएम) ग्रांट फरीदाबाद के हाथ से निकल गई। इसके बाद हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने नगर निगम से जवाब तलब किया है। निदेशालय ने निगम को जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि फरीदाबाद प्रदेश का एकमात्र मिलियन प्लस शहर है। इसी आधार पर केंद्र सरकार ने साल 2024-25 के लिए 57 करोड़ और 2025-26 के लिए 58 करोड़ रुपये की अनुदान राशि निर्धारित की थी। नगर निगम केंद्र सरकार द्वारा तय सर्विस लेवल बेंचमार्क पूरे नहीं कर सका। इसके चलते केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने राशि जारी करने से इन्कार कर दिया।
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कई बार हाथ से निकली ग्रांट
नगर निगम के साथ यह पहली बार नहीं हुआ है। विभागीय पत्र के अनुसार साल 2021-22 और 2023-24 में भी फरीदाबाद निर्धारित स्वच्छता मानकों पर खरा नहीं उतर सका था। इसके कारण केंद्र सरकार ने एसडब्ल्यूएम ग्रांट वापस ले ली थी यानी नगर निगम लगातार तीसरी बार ठोस कचरा प्रबंधन में असफल साबित हुआ है।
जिम्मेदारी तय कर विस्तृत रिपोर्ट भेजने के निर्देश
22 मई 2026 को जारी पत्र में शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने नगर निगम से पूछा है कि निर्धारित लक्ष्य पूरे क्यों नहीं हुए और इसके लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं। विभाग ने जिम्मेदारी तय कर विस्तृत रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि 16वें वित्त आयोग के तहत भविष्य में मिलने वाली अनुदान राशि के लिए सभी पात्रता शर्तों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। नगर निगम ने निदेशालय द्वारा मार्च 2026 में जारी पहले निर्देश का अनुपालन रिपोर्ट तक नहीं भेजी।
ये हैं नियम
-केंद्र सरकार से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट ग्रांट प्राप्त करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होता है।

- इसके तहत चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण करना होता है। कचरे को उत्पत्ति के स्थान पर ही चार अलग-अलग धाराओं में बांटना अनिवार्य है। गीला कचरा (रसोई और जैविक अपशिष्ट), सूखा कचरा (प्लास्टिक, कागज, धातु आदि), सैनिटरी कचरा (डायपर, सैनिटरी पैड) तथा विशेष देखभाल वाले कचरे (बैटरी, दवाइयां, ई-वेस्ट आदि) में अलग-अलग करना अनिवार्य होता है।

- निगम के पास हर घर से कचरा उठाने और परिवहन के लिए निरंतर संचालन व रखरखाव बजट का प्लान होना चाहिए। इसमें यूजर चार्ज वसूलने का प्रावधान हो। इसके अलावा 20 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले मॉल, होटल, संस्थान और प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले परिसरों को अपने परिसर में ही कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण करना होगा।

- केंद्र सरकार द्वारा मिली ग्रांट का उपयोग केवल कम्पोस्टिंग प्लांट, बायो-मीथेनेशन, मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी और वैज्ञानिक लैंडफिल जैसे प्रसंस्करण संयंत्रों को स्थापित करने के लिए किया जा सकता है। नियमों के तहत स्थानीय निकायों को केंद्रीय ऑनलाइन पोर्टल पर कचरा प्रबंधन की वार्षिक रिपोर्ट जमा करनी होती है।


स्वच्छता सर्वेक्षण में भी गिर रही रैंकिंग

सफाई व्यवस्था पर नगर निगम हर साल करीब 150 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। इसके बावजूद शहर स्वच्छता के मामले में लगातार पिछड़ रहा है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मंत्रालय की ओर से जारी स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 में जिले को देश के 40 बड़े शहरों में 34वां स्थान मिला है। पिछले वर्ष यह 446 शहरों की सूची में 381वें स्थान पर था। शहर में कई इलाकों में नियमित कूड़े का उठान नहीं हो रहा है। सफाई के तय मानकों पर काम नहीं होने का असर शहर की रैंकिंग पर साफ दिखाई दे रहा है।
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नगर निगम शहर की स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संबंधित मामले की जानकारी नहीं है। अगली बार केंद्र सरकार से मिलने वाले बजट का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। स्वच्छता कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी। शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
- प्रवीण बत्रा जोशी, मेयर, नगर निगम
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