सरकार की ओर से जागरूकता अभियान और संसाधन उपलब्ध कराए जाने के बावजूद प्रदेश में परिवार नियोजन की दर पिछले दस साल में महज .3 फीसदी बढ़ सकी है। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले दशक के मुकाबले पुरुष नसबंदी की दर घटी है, महिलाओं ने भी गर्भनिरोधक गोली और नलबंदी से मुंह मोड़ा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से करवाए गए चौथे नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में यह तथ्य सामने आए हैं।
सर्वे के मुताबिक, 2005-06 में प्रदेश में कुल 63.4 फीसदी परिवारों ने फैमिली प्लानिंग अपनाई थी। 2015-16 में प्रदेश में परिवार नियोजन अपनाने वाले परिवारों की संख्या सिर्फ .3 फीसदी बढ़कर 63.7 हुई है। पुरुषों ने तो जैसे नसबंदी से मुंह ही मोड़ लिया। नसबंदी कराने वालों की दर सात प्रति हजार से घट कर छह प्रति हजार ही रह गई है।
सर्वे के मुताबिक, परिवार नियोजन का भार अभी भी पूरी तरह से महिलाओं पर ही है। परिवारों में 88 फीसदी महिलाएं गर्भ निरोधक साधन प्रयोग करती हैं, जबकि महज 12 फीसदी पुरुष कंडोम का इस्तेमाल कर रहे हैं। 59.4 फीसदी महिलाओं ने परिवार नियोजन के आधुनिक साधन चुने हैं।
पिछले सर्वे के मुकाबले यह दर 1.1 फीसदी बढ़ी है। हालांकि नसबंदी जैसे स्थायी साधन से महिलाओं ने भी मुंह मोड़ा है। पिछले सर्वे में 38.2 फीसदी महिलाओं ने नसबंदी अपनाई थी। इस सर्वे में .1 फीसदी की कमी के साथ महिला नसबंदी की दर 38.1 दर्ज की गई। गर्भ निरोधक गोलियाें का इस्तेमाल भी पिछले दशक के 2.8 फीसदी के मुकाबले घट कर 2.7 फीसदी रह गया है।