- ग्राम पंचायत की 100 प्रतिशत जमीन आईएमटी के लिए हुई अधिग्रहीत
-न तो खेत बचे हैं और न ही घर बनाने के लिए एक इंच जमीन
-छत की आस में जिला उपायुक्त के दरबार में गरीब परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। विकास की रफ्तार जब गांव की दहलीज तक पहुंची, तो खेडली कंकर के गरीब परिवारों के लिए यह खुशहाली नहीं, बल्कि बेघर होने की पीड़ा लेकर आई। जिस मिट्टी पर पीढ़ियों ने जन्म लिया, जहां बचपन खेला और बुढ़ापा देखने का सपना बुना, वही जमीन आईएमटी सोहना के नाम पर अधिग्रहीत कर ली गई। आज हालात यह हैं कि बीपीएल, एससी और बीसी वर्ग के दर्जनों भूमिहीन परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा है कि अब सिर छुपाने की जगह कहां होगी?
आंसुओं और उम्मीद के साथ ग्रामीण जिला उपायुक्त के कार्यालय पहुंचे। हाथों में ज्ञापन था और आंखों में छत का सपना। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम खेडली कंकर और ग्राम पंचायत की 100 प्रतिशत जमीन आईएमटी सोहना के लिए अधिग्रहित हो चुकी है। उनके पास न तो खेत बचे हैं और न ही घर बनाने के लिए एक इंच जमीन। महिलाएं अपने बच्चों की ओर इशारा करते हुए कहती दिखीं कि अगर आज घर नहीं मिला, तो कल हमारे बच्चों का भविष्य क्या होगा। ग्रामीणों का दर्द तब और गहरा हो जाता है जब वे आसपास के गांवों का जिक्र करते हैं, जहां कंवर्सिका, खोड़, बसई, रेवासन और महरोला में 100-100 गज के प्लॉट काटे जा चुके हैं। ज्ञापन में मांग की गई कि सरकार उन्हें भी 100-100 गज के आवासीय प्लॉट दे या फिर आईएमटी सोहना में अधिग्रहित जमीन में से सात से आठ एकड़ भूमि गरीबों के लिए छोड़ी जाए।