फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेला : सूरजकुंड मेले में चिकनकारी की कला को पसंद कर रहे लोग

विज्ञापन
विज्ञापन
चिकनकारी से निर्मित साड़ियां, सूट, लहंगे और अनारकली को किया गया प्रदर्शित
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। सूरजकुंड मेले में आने वाले लोगों को चिकनकारी काफी पसंद आ रही है। उत्तर प्रदेश के अंतर्गत स्टॉल नंबर 137 पर सजी यह दुकान पारंपरिक चिकनकारी कढ़ाई को जीवित रखे हुए है। यहां चिकनकारी से निर्मित साड़ियां, सूट, लहंगे और अनारकली प्रदर्शित किए गए हैं।

दुकान संचालक संजय अग्रवाल ने बताया कि यह उनके ससुर नवनीत अग्रवाल का पुश्तैनी काम है। उनके साले अजय अग्रवाल ने पुश्तैनी काम को जीवित रखते हुए आगे बढ़ाया। साल 1990 से वह दोनों इस पारंपरिक कला को संजोए हुए हैं। उन्होंने बताया कि चिकनकारी कढ़ाई के लिए पहले कपड़े की कटाई की जाती है, फिर सिलाई और छपाई के बाद कारीगर उस पर बारीक कढ़ाई करते हैं। इसके बाद धुलाई और पैकिंग की जाती है। उन्होंने बताया कि सेट, लहंगा या साड़ी हो उसको पूरी तरह से एक ही कारीगर द्वारा तैयार किया जाता है। इसी वजह से एक ड्रेस को पूरा करने में कई बार एक साल तक का समय लगता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इन जगहों पर भी लगा चुके अपनी स्टॉल
उन्होंने बताया कि वह आगरा में 15 वर्षों से, प्रगति मैदान में 8 वर्षों तक तथा बॉम्बे, जयपुर, जोधपुर, बांदी, अजमेर, टाटानगर, जमशेदपुर और रांची जैसे शहरों में अपनी स्टॉल लगा चुके हैं। सूरजकुंड मेले में वह पहली बार आए हैं। उन्होंने बताया कि स्टॉल पर 500 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक के परिधान उपलब्ध है। वह इस बार मेले में मलचंदेरी, मल कॉटन, ऑर्गेंजा, कॉटन और टिशू फैब्रिक पर किया गया हैंडमेड वर्क को लेकर आए हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें