फरीदाबाद। कंबल के उपयोग से नौनिहालों को अस्थमा का खतरा बढ़ रहा है। हर समय कंबल में रहने से छोटे बच्चों की नाक में कंबल के रेशे चले जाते हैं, जिससे आगे चलकर बच्चों में अस्थमा की समस्या देखी जाती है। वरिष्ठ बाल रोग चिकित्सक डॉ. रमेश अग्रवाल ने बताया पहले अस्पताल में महीने में 25 से 30 मरीज पहुंचते थे, लेकिन अब इनकी संख्या 40 से 50 हो गई है।
पांच वर्ष से कम उम्र में यदि बच्चों को सांस लेने में कोई समस्या हो रही है, तो उसे अस्थमा नहीं बल्कि एलर्जी श्वसन रोग कहा जाता है। कम उम्र में बच्चों को बहुत जल्दी एलर्जी हो जाती है। इसके अलावा पांच वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को सांस लेने में समस्या होती है, तो उसे अस्थमा कहा जाता है। बीते कुछ वर्षों से अस्थमा के मरीजों का आंकड़ा बढ़ रहा है।
खराब व पुराने कंबल बच्चों की सेहत पर डाल रहे असर
अक्सर देखा जाता है, जब भी बच्चा पैदा होता है, उसको सबसे पहले पुराने कंबल में रखा जाता है। पुराना कंबल खराब हो जाता है, उसमें से रेशे निकलते हैं, जो बच्चों की नाक के जरिये उनके शरीर में भी पहुंचते हैं। ऐसे में डॉक्टरों द्वारा कई बार समझाया जाता है कि बच्चों को साफ कपड़ों व कंबल में रखें, लेकिन कुछ लोग नहीं मानते हैं और आगे चलकर परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कई कारणों से होता है अस्थमा
छोटी उम्र में अस्थमा केवल किसी एक कारण से नहीं बल्कि कई कारणों से होता है। जिनमें पुराना कंबल, प्रदूषण, घर में किसी का धूम्रपान करना, खराब जीवनौली, प्रतिरक्षा प्रणाली का कमजोर होना, बिना डॉक्टर से परामर्श के दवाई लेना व अन्य कारण शामिल हैं।
खराब वातावरण बच्चों की सेहत पर अधिक प्रभाव डाल रहा है। छोटे बच्चे घर का खाना खाने की बजाय बाहर का जंक फूड काफी पसंद कर रहे हैं, जिससे बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली खराब हो रही है। पहले बच्चे घरों से निकलकर बाहर पार्क व अन्य स्थानों पर विभिन्न गतिविधियां व खेल खेलते थे। अब छोटे- छोटे बच्चे घरों में सारा दिन फोन का इस्तेमाल करते हैं, जिससे बच्चों में मोटापे की समस्या भी बढ़ रही है। -
डॉ. रमेश अग्रवाल, वरिष्ठ बाल रोग चिकित्सक
गर्मी और सर्दी में अधिक मामले आते हैं सामने
अधिक गर्मी व अधिक सर्दी में अस्थमा के मरीज अधिक सामने आते हैं। अधिक गर्मी के कारण बच्चों को सांस लेने में परेशानी होती है। वहीं अधिक सर्दी में भी बच्चों की जल्दी सांस फूलने लगती है। इसका समाधान अच्छा खानपान व प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहना है। इसके अलावा बिना डॉक्टर से परामर्श और बिना रोग जाने मेडिकल स्टोर से दवाई का सेवन करना घातक साबित हो सकता है। इससे आगे चलकर परेशानी हो सकती है।
डॉ. प्रभात वाजपेई, बाल रोग चिकित्सक