प्रवासी भारतीय दिवस
भारती दुबे
फरीदाबाद। जिले के कई ऐसे लोग हैं, जो आज कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के विभिन्न देशों में रह रहे हैं, लेकिन दिल से अब भी अपनी मिट्टी से जुड़े हुए हैं। विदेश में रहते हुए भी वे फरीदाबाद जिले के सामाजिक विकास में लगातार योगदान दे रहे हैं और समय-समय पर जिले में आकर समाज के हित में कार्य कर रहे हैं।
कुछ लोग रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश गए, लेकिन उन्होंने अपने जिले को कभी नहीं भुलाया। कोई शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग कर रहा है तो कोई स्वास्थ्य सेवाओं, गरीबों की मदद और जरूरतमंद बच्चों की सहायता के लिए आगे आ रहा है। वहीं कई लोग स्वच्छता अभियान से जुड़कर लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक कर रहे हैं और समाज में सकारात्मक संदेश दे रहे हैं।
जिले से बाहर जाकर बस चुके कई प्रवासियों को जब अपनी मिट्टी की याद आती है, तो तुरंत अपने घर लौट आते हैं। कई लोग भविष्य बनाने के चक्कर में अपना परिवार यहीं छोड़ जाते हैं, किसी के माता- पिता तो किसी की पत्नी यहां रहती है। जिससे मिलने के लिए एनआरआई दौड़ा चले जाते हैं। यहां आने के बाद समाज के लिए अच्छा कार्य करते हैं। इन लोगों का मानना है कि चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में रहें, अपनी जन्मभूमि के प्रति जिम्मेदारी निभाना उनका कर्तव्य है।
मैं शादी के बाद अपने पति के साथ अमरीका बस गई, लेकिन प्रतिवर्ष जिले में आयोजित होने वाली श्रद्धा रामलीला कमेटी में केकई का किरदार निभाने के लिए आती हूं। मुझे अपनी संस्कृति और अपनी धरती पर गर्व हैं। इससे अच्छी किसी भी देश की मिट्टी नहीं हो सकती।
मिशा भाटिया, अमरीका
मैं भले ही दूसरे देश चला गया, लेकिन अपनी मिट्टी और संस्कृति कभी नहीं भूल सकता। मैं प्रतिमाह श्री सिद्धदाता आश्रम में सेवा भाव से आता है। आश्रम से मैं 1994 से जुड़ा हुआ हूं। माह में दो दिन ही सही, लेकिन आश्रम में आयोजित हर कार्यक्रम में सेवा देने के लिए पहुंचता हूं। चाहे वो लंगर हो, गौशाला को लेकर कार्यक्रम हो या आर्थिक रूप से सहायता हो।
रोहित सिडवानी, दुबई
बेहतर भविष्य के चलते मैं दूसरे देश बस गया, लेकिन अपने घर की बात ही अलग है, मैं पूरे परिवार के साथ यहां आकर समाज के हित में कार्य करता हूं। मैं लोगों को स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर जागरूक करता हूूं, ताकि हम आने वाले समय में खुली हवा में सांस ले सकें।
मनीष ठाकुर, कनाडा