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Faridabad News: करोड़ों का जल शुल्क देने के बाद भी शुद्ध पानी नसीब नहीं

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फरीदाबाद में पेयजल व्यवस्था सुधारने की जरूरत
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निगम आयुक्त ने पानी की सफाई को लेकर दिए सख्त निर्देश

अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। प्रदेश सरकार को राजस्व देने वाले प्रमुख शहरों में शामिल फरीदाबाद में शुद्ध पेयजल की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। औद्योगिक नगरी होने के बावजूद यहां के नागरिकों को पानी का पूरा शुल्क चुकाने के बाद भी पीने योग्य पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। नगर निगम फरीदाबाद हर साल शहरवासियों से लगभग 14 करोड़ रुपये केवल पानी के शुल्क के रूप में वसूलता है लेकिन इसके बदले जो पानी लोगों के घरों तक पहुंच रहा है उसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।

शहर के अधिकांश रिहायशी इलाकों में स्थिति यह है कि निगम का पानी अब पीने और भोजन पकाने के लिए इस्तेमाल ही नहीं किया जा रहा। मजबूरी में लोग आरओ का पानी खरीदकर उपयोग कर रहे हैं। अनुमान के अनुसार फरीदाबाद की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी अब निगम के पानी पर भरोसा नहीं करती। यह स्थिति केवल एक या दो इलाकों तक सीमित नहीं बल्कि एनआईटी क्षेत्र से लेकर बल्लभगढ़ तक फैली हुई है। वहीं इंदौर की घटना सामने आने के बाद निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने सभी स्थानों पर सप्लाई होने वाले पेयजल के सैंपल लेने के निर्देश जारी किए हैं व लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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कई इलाकों में पानी का टीडीएस स्तर 1200 से 1600 तक पहुंच गया
जानकारों का कहना है कि कई इलाकों में पानी का टीडीएस स्तर 1200 से 1600 तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार सुरक्षित पेयजल के लिए टीडीएस का स्तर 300 के आसपास होना चाहिए। इतना अधिक टीडीएस वाला पानी लंबे समय तक सेवन करने से किडनी, लीवर, पेट और हड्डियों से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इसके बावजूद नगर निगम की ओर से न तो किसी इलाके को असुरक्षित घोषित किया गया है और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

नगर निगम की जल आपूर्ति प्रणाली रेनीवेल, ट्यूबवेल और बूस्टरों पर आधारित है। शहर में कुल 69 बूस्टर संचालित हो रहे हैं, जिनसे लाखों लोगों तक पानी पहुंचाया जाता है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन बूस्टरों पर नियमित पानी जांच की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। कई बूस्टरों पर तैनात कर्मचारियों के पास टीडीएस जांच की मशीन तक उपलब्ध नहीं है। न ही पानी की गुणवत्ता से संबंधित कोई रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाता है।

लोग वर्षों से दूषित पानी की शिकायत कर रहे
जवाहर कॉलोनी, संजय कॉलोनी, चावला कॉलोनी, सेक्टर-22, एनआईटी-1, एनआईटी-2 और एनआईटी-5 जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में लोग वर्षों से दूषित पानी की शिकायत करते आ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार पानी में बदबू आती है तो कई बार वह खारा होता है। कुछ इलाकों में तो ऐसा पानी आता है कि घरों की टंकियों को बार-बार साफ करना पड़ता है।
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उल्टी-दस्त, पेट दर्द, कमजोरी और लिवर से जुड़ी शिकायतें सामने आ रहीं
दूषित पानी का असर अब लोगों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। उल्टी-दस्त, पेट दर्द, कमजोरी और लिवर से जुड़ी शिकायतें सामने आ रहीं हैं। कुछ मामलों में मरीजों को अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ा है। इसके बावजूद न तो नगर निगम और न ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई संयुक्त स्वास्थ्य सर्वे कराया गया है, जिससे यह पता चल सके कि दूषित पानी से कितनी आबादी प्रभावित हो रही है।इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों की घटना के बाद फरीदाबाद नगर निगम ने सतर्कता के दावे जरूर किए हैं। निगम का कहना है कि अब पानी के नमूने लैब में भेजे जा रहे हैं और बूस्टरों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।
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