फरीदाबाद (धनंजय चौहान)। सेक्टर-8 स्थित ईएसआई अस्पताल की हालत जर्जर है। ओपीडी ब्लॉक में प्लास्टर झड़ता रहता है। कोरोना काल में यहां रोज 750 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। वैसे इसके भवन की मरम्मत के लिए क्षेत्रीय कार्यालय दो बार बजट पास कर चुका है, लेकिन मरम्मत अब तक नहीं हो पाई है।
सेक्टर-8 स्थित 50 बेड के ईएसआई अस्पताल का निर्माण 40 साल पहले हुआ था। इससे शहर की 5 ईएसआई डिस्पेंसरी जुड़ी हुई हैं। अपनी ओपीडी के अलावा इनसे भी मरीज रेफर होकर यहां पहुंचते हैं। यहां स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत बेहद खस्ता है। छत कई जगह से जर्जर है। आए दिन लिंटर झड़ता रहता है। सेंट्रल एसी कबाड़ हो चुका है। भीषण गर्मियों में भी डॉक्टरों और मरीजों को पंखों के सहारे रहना पड़ता है। एक डॉक्टर ने बताया कि कई बार लगता है कि लिंटर गिर जाएगा। डॉक्टरों को भी डर के साये में इलाज करना पड़ता है।
सेक्टर-16 स्थित ईएसआईसी के क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से इसकी मरम्मत के लिए करीब 10 महीने पहले 12 करोड़ रुपये का बजट पास हुआ था। काम केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) को सौंपा गया। विभाग की टीम सर्वे ने सर्वे किया, लेकिन इसके बाद यह फाइल दब गई। अब तक इस पर कोई काम नहीं हुआ है। विभागीय सूत्रोें का कहना है कि इससे करीब एक साल पहले भी अस्पताल की मरम्मत के लिए बजट पास हुआ था, लेकिन इसके बाद कुछ नहीं कराया गया। इंकलाबी मजदूर केंद्र के सचिव संजय मौर्या का कहना है कि विभाग मजदूरों के वेतन से हर महीने करोड़ों रुपये काटता है, लेकिन यहां सुविधाओं की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। अस्पतालों में मरीजों के लिए पेयजल और शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है।
डॉक्टरों और स्टाफ की भी कमी
अस्पताल में इलाज के लिए रोज करीब 750 मरीज पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टरों की संख्या केवल 19 है। नर्सिंग स्टाफ की भी भारी कमी है। टेक्निकल स्टाफ भी पूरा नहीं है। डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को ओपीडी में इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
कोरोना के कारण रुकी मरम्मत
मरम्मत का काम कोरोना महामारी के कारण रुका हुआ है। जल्द ही भवन की मरम्मत से संबंधी फाइल की जांच कराई जाएगी। अधिकारियों को जल्द काम शुरू करने के आदेश दिए जाएंगे। - आशीष दीक्षित, उप निदेशक, ईएसआईसी, क्षेत्रीय कार्यालय