फरीदाबाद। कर्मचारी संगठन की ओर से बृहस्पतिवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न विभागों के कर्मचारी शामिल रहे। इस कारण विभागों में कामकाज ठप रहा। कर्मचारियों ने अपने कार्यालयों के बाहर धरने दिए। केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद निगम मुख्यालय पर एकत्रित होकर कर्मचारियों ने जुलूस निकाला और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहीं हड़ताल से बैंकों में करीब आठ सौ करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री, जिला प्रधान अशोक कुमार, सचिव बलबीर सिंह बालगुहेर, कोषाध्यक्ष युद्धवीर सिंह खत्री, उप प्रधान अतर सिंह केशवाल ने हड़ताल की सफलता का दावा किया है। उन्होंने कहा कि जरूरी सेवाओं को बाधित नहीं किया गया।
प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा व वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री ने बताया कि हड़ताल का सबसे ज्यादा असर नगर निगम में रहा। बल्लभगढ़, ओल्ड व निगम मुख्यालय में हड़ताल की वजह से सन्नाटा पसरा रहा और मुख्य द्वार पर ताले लटके रहे। इस दौरान कामकाज ठप रहा है। ऐसे में कामकाज के लिए आने वाले लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के तकनीकी स्टाफ और बिजली निगम कर्मचारी शामिल रहे। इस दौरान बिजली बिलों व बिजली संबंधी शिकायतों का निपटारा नहीं हो सका। इस कारण उपभोक्ताओं को निराश होकर लौटने पर मजबूर होना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवाओं में तैनात कर्मचारियों को छोड़कर बाकी ठेका कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हुए और प्रदर्शन किया। हरियाणा टूरिज्म के सूरजकुंड, बड़खल, मेगपाई, गोल्फ कोर्स, होटल राजहंस पर्यटन स्थलों के लगभग शत-प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल पर रहे। जन स्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने हड़ताल में शामिल होकर काम काज ठप कर दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किए।
यह हैं कर्मचारियों की मांगेंं
प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि राष्ट्रव्यापी हड़ताल की प्रमुख मांगों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं विभागों के निजीकरण पर रोक लगाने, ठेका प्रथा समाप्त कर ठेका कर्मचारियों को सीधे विभागों के पे रोल पर लेने, सेवा सुरक्षा एवं समान काम समान वेतन देने, रेगुलराइजेशन की नीति बनाने, पुरानी पेंशन बहाल करने, डीए व एलटीसी पर लगाई रोक को हटाने, जबरन तरीके से पारित किए श्रम कानूनों व कृषि बिलों को रद्द करने, बिजली संशोधन बिल 2020 के ड्राफ्ट को वापस लेने, रोडवेज सहित अन्य विभागों में तेजी से लागू की जा रही निजीकरण की नीतियों पर रोक लगाने, खाली पड़े लाखों पदों को स्थायी भर्ती से भरते हुए बेरोजगारों को रोजगार देने आदि शामिल है।
आयकर कार्यालय में कामकाज रहा ठप
इस हड़ताल में इनकम टैक्स इंपलाइज फेडरेशन ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। इस दौरान विभाग के सभी कार्यालयों में कामकाज ठप रहा। फेडरेशन के सदस्यों ने कोविड नियमों का पालन करते हुए कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। फेडरेशन के अध्यक्ष विश्वास वर्मा और सचिव संदीप यादव ने कहा सरकार की निजीकरण की नीतियों का वह विरोध करते है। आईटीईएफ के कार्यकारी अध्यक्ष यशवंत पुरोहित ने बताया कि हड़ताल के हथियार का प्रयोग श्रमिक वर्ग द्वारा तब किया जाता है। जब उनके सामने कोई दूसरा रास्ता बाकी नहीं होता है। देश की लगभग 12 केंद्रीय ट्रेड यूनियन के साथ आयकर कर्मचारी महासंघ भी शामिल रहा।
बैंकों का काम भी रुका
हड़ताल में हरियाणा बैंक इंप्लाइज फेडरेशन भी शामिल रही। इसमें केनरा बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, इंडियन बैंक व सिंडिके ट बैंक के अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे। इन बैंकों में कैश लेनदेन सहित सभी प्रकार के कामकाज बंद रहा। बैंक में कैश संबंधी काम के लिए आने वाले लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। फेडरेशन के सलाहकार कृपाराम और अध्यक्ष ईश्वर चंद ने बताया कि एक दिन की हड़ताल से करीब आठ सौ करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। वहीं दूसरी तरह नीलम चौक स्थित एसबीआई में सामान्य दिनों की तरह कामकाज हुआ। हड़ताल में शामिल बैंकों के चेक क्लीयरिंग में थोड़ी परेशानी हुई।