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नवरात्र में नारी शक्ति को संबल : विधवा पेंशन योजना से बढ़ रहा आत्मविश्वास

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फरीदाबाद। नवरात्र के दौरान जहां देवी शक्ति की आराधना के माध्यम से नारी के सामर्थ्य और सम्मान का संदेश दिया जाता है, वहीं समाज में ऐसी अनेक महिलाएं भी हैं जो जीवनसाथी के निधन के बाद भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इसी संदर्भ में विधवा एवं निराश्रित महिला पेंशन योजना एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर उभरी है, जो न केवल उन्हें आर्थिक सहयोग प्रदान करती है, बल्कि आत्मसम्मान के साथ आत्मनिर्भर जीवन जीने की दिशा में भी सशक्त बनाती है।

जिले में वर्तमान में 45 हजार से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं। वहीं पूरे हरियाणा में लगभग 8.15 लाख से अधिक लाभार्थी इस सामाजिक सुरक्षा पहल से जुड़ी हुई हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं के लिए यह योजना दैनिक जरूरतों को पूरा करने का महत्वपूर्ण आधार बन गई है।
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योजना का बढ़ता दायरा

राज्य में वर्ष 1980-81 में शुरू की गई इस योजना के तहत शुरुआत में मात्र 50 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाती थी। समय के साथ सरकार ने इसमें लगातार बढ़ोतरी की है। 1 अप्रैल 2021 से पेंशन राशि बढ़ाकर 2,500 रुपये की गई और वर्तमान में 1 जनवरी 2024 से इसे बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।



आत्मनिर्भरता की ओर कदम

जिले की कई महिलाएं इस पेंशन राशि का उपयोग अपने दैनिक खर्च, दवाइयों और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में कर रही हैं। इससे वे दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही हैं।


दो साल पहले मेरे पति की बीमारी से मृत्यु हो गई। परिवार पहचान पत्र में गड़बड़ी की वजह से आवेदन में दिक्कत हुई लेकिन बाद में सुधार के बाद योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ है। अपनी जरूरतों के लिए बच्चों पर निर्भरता कम हुई है।-इंद्रावती, एसी नगर

इस योजना से मिलने वाली राशि मेरे लिए बड़ा सहारा है। इससे मैं अपने जरूरी खर्च आसानी से पूरा कर पा रही हूं। बूढ़ापे में दवाइयों के लिए बच्चों पर निर्भरता नहीं है। पोते की पढ़ाई की छोटी-मोटी जरूरतों में भी मदद कर देती हूं।-सरस्वती देवी, मेवला महाराजपुर


पेंशन से मुझे और मेरी जैसी महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा का एहसास हुआ है। इससे हमारे जीवन में स्थिरता आई है और आत्मविश्वास भी बढ़ा है। जरूरतों पर खर्च के अलावा कुछ बचत भी करती हूं।-फुलकारी देवी, ऐतमादपुर
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मुझे उच्च रक्तचाप और मधुमेह है, जिसकी वजह से कई दवाइयां खानी पड़ती है। अपनी पेंशन का बड़ा हिस्सा दवाइयों और अपने खान-पान पर खर्च करती हूं। पेंशन की वजह से सम्मानजनक बुढ़ापा जी रही हूं।-आनंदी देवी, भीम बस्ती
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