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वाईएमसीए में क्वारंटीन किए गए कोरोना संभावित बीके अस्पताल से निकल भागे

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वाईएमसीए में क्वारंटीन किए गए मरीज बीके अस्पताल से भागे
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फरीदाबाद वाईएमसीए यूनिवर्सिटी में क्वारंटीन किए गए कोरोना संभावित आठ मरीज बीके सिविल अस्पताल से निकल भागे। इसका पता चलने पर अस्पताल में अफरातफरी मच गई। इस पर अस्पताल के सुरक्षाकर्मी ने दौड़कर उन्हें नगर निगम मुख्यालय के गेट पर रोका और पुलिस को सूचित किया। स्वास्थ्य विभाग शुक्रवार को इन्हें क्वारंटीन केंद्र से बीके सिविल अस्पताल में सैंपल लेने के लिए लेकर आया था। दोपहर को इन्हें वापस क्वारंटीन केंद्र भेज दिया गया।
गांव अरुआ चांदपुर में कोरोना पॉजिटिव दो जमातियों के मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उनके परिवारजनों सहित उनके संपर्क में आए लोगों को वाईएमसीए यूनिवर्सिटी में बनाए गए सेंटर में क्वारंटीन कर रखा है। शुक्रवार को अरुआ चांदपुर के आठ लोगों (पांच बड़े व तीन बच्चे) को स्वास्थ्य विभाग की टीम बीके सिविल अस्पताल में जांच व सैंपल लेने के लिए लेकर आई थी। दोपहर को सभी की जांच के बाद उन्हें वापस भेजना था, लेकिन वह स्वास्थ्य कर्मियों की आंख बचाकर अस्पताल से बाहर निकल गए। इस दौरान उनकी तलाश शुरू हुई और नहीं मिलने पर अस्पताल में अफरातफरी मच गई। अस्पताल में तैनात निजी सुरक्षाकर्मियों को उनकी तलाश में दौड़ाया गया तो एक सुरक्षाकर्मी ने उन्हें अस्पताल से थोड़ा आगे निगम मुख्यालय के गेट के पास पकड़ लिया।
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कोरोना संभावित एक महिला ने आरोप लगाया कि अस्पताल वाले पांच दिन पहले जांच के नाम पर उन्हें गांव से 15 मिनट में वापस छोड़ने की बात कह कर लेकर आए थे और उसके बाद वाईएमसीए में लाकर छोड़ दिया। पांच दिन से न तो कोई डॉक्टर चेक करने आया और न ही कोई सैंपल लेने। शुक्रवार को पांच दिन बाद सैंपल लेने के लिए उन्हें बीके अस्पताल लाया गया। सैंपल लेने के दो घंटे बाद भी कोई उन्हें वापस छोड़ने नहीं जा रहा था। इस पर वे खुद ही अपने घर को चल दिए।
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पशुओं को देखने वाला भी कोई नहीं
क्वारंटीन किए गए लोगों में चार महिलाएं, एक पुरुष व तीन बच्चे थे। महिलाओं ने रोते हुए बताया कि उनकी फसल तैयार खड़ी है और पीछे कटाई वाला कोई नहीं हैं। पशुओं को चारा देने वाला भी कोई नहीं है। अस्पताल वाले कह रहे हैं कि 14 दिन यहां रहना पड़ेगा तो उनकी फसल कौन काटेगा। पशुओं का ध्यान कौन रखेगा। सरकार 500 रुपये दे रही है। इससे क्या होगा।
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जिन लोगों में कोई लक्षण नहीं होते तो उनका सैंपल चार-पांच दिन बाद लिया जाता है। गांव अरुआ चांदपुर से लाए गए लोगों को शुक्रवार को सैंपल लेने के लिए लाया गया था। इस दौरान उन्हें एंबुलेंस में ही लाया जाता है और एंबुलेंस में ही वापस छोड़ने जाते हैं। इस दौरान वे कब निकल गए पता नहीं चला। बाद में इन्हें एंबुलेंस में ही वापस वाईएमसीए स्थित क्वारंटीन सेंटर भेज दिया गया।
- डॉ. रामभगत, उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी
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