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जंगल में भटकता नजर आ रहा है वन विभाग का ड्रोन सर्वे

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फरीदाबाद। अरावली में बने फार्म हाउसों और शिक्षण संस्थानों पर तोड़फोड़ कार्रवाई को लेकर अधिकारी ज्यादा सजग नजर नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि वन विभाग द्वारा कराया गया जा रहा ड्रोन सर्वे जंगल में भटकता नजर आ रहा है। पांच अगस्त को शुरू हुआ सर्वे अभी तक पूरा नहीं हुआ है। जबकि खोरी में तोड़फोड़ को लेकर किया गया सर्वे दो से तीन दिन में पूरा कर लिया गया था। इससे वन विभाग की अधिकारियों की लापरवाही साफ तौर पर नजर आती है।
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सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश जारी किया था कि अरावली वन क्षेत्र में जो भी अवैध निर्माण है उन पर कार्रवाई की जाएगी। वन क्षेत्र को खाली कराकर उस पर जंगल बसाया जाए। इसके लिए वन विभाग की ओर से ड्रोन सर्वे शुरू किया गया था। ताकि अवैध निर्माण की संख्या का पता लगाया जा सके लेकिन अभी तक ड्रोन सर्वे पूरा नहीं हो पाया है। खोरी में दो दिन निगम ने पूरा किया था ड्रोन सर्वे जब सुप्रीम कोर्ट की ओर ने खोरी के अवैध निर्माण को हटाने का आदेश जारी किया गया था तो तत्कालीन निगम आयुक्त डॉ. गरिमा मित्तल ने भी ड्रोन सर्वे करवाया था। लेकिन यह सर्वे दो से तीन दिन के भीतर ही पूरा कर लिया गया था। इसके बाद कार्रवाई शुरू कर दी गई थी।
अरावली वन क्षेत्र में शिक्षण संस्थान और अवैध फार्म हाउस काफी संख्या में बने हुए है। हालांकि इनमें से कई शिक्षण संस्थान ने नगर निगम में सीएलयू के लिए अप्लाई भी किया हुआ है। इसके अलावा कई शिक्षण संस्थानों को सीएलयू मिल भी चुका है। वहीं तीन संस्थान ऐसे है जिनको वन विभाग ने भी एनओसी दी हुई है। ऐसे में जिला प्रशासन, नगर निगम और वन विभाग उलझन में है कि इन संस्थानों को किस श्रेणी में रखा जाए। इसको लेकर नगर निगम के प्लानिंग ब्रांच ने सरकार को प्रस्ताव भेजा था। जिससे सरकार कोर्ट में अपना पक्ष रख सके। इस मामले में 20 अगस्त को सुनवाई होनी है।
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वन विभाग की ओर से अरावली वन क्षेत्र में बने अवैध निर्माण का ड्रोन सर्वे करवाया जा रहा है जो अभी पूरा नहीं हुआ है। सर्वे पूरा होने के बाद कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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- राजकुमार, वन विभाग अधिकारी
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