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ब्रांडेड दवाओं के नाम नहीं लिख सकेंगे डॉक्टर

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फरीदाबाद। निजी व सरकारी स्तर पर डॉक्टर केवल दवाओं के मूल नाम यानी जेनेरिक नाम ही मरीजों को परामर्श करेंगे। सोमवार से यह आदेश लागू हो गए हैं। अब कोई भी डॉक्टर गैर जेनेरिक दवाएं मरीजों को नहीं लिख सकेंगे। दरअसल, जेनेरिक दवाएं किसी भी दवा को बनाने वाले घटक के मूल नाम पर आधारित होती हैं। वहीं ब्रांडेड दवाओं में मूल नाम के बजाए कंपनी के नाम पर बेची जाती है। इससे दवा का मूल्य कई गुना बढ़ जाता है।
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महंगी दवाएं मरीज के इलाज के खर्च को कई गुना बढ़ा देती हैं। इससे कई निजी कंपनियां मनचाहा लाभ कमा रही हैं। इन निजी कंपनियों को डॉक्टर किसी स्तर पर बढ़ावा न दें, इसके लिए मेडिकल आचार संहिता के अनुरूप ही दवाओं के नाम परामर्श में डॉक्टरों को लिखने होंगे। आदेशों की अवहेलना करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ पेशे के नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणदीप पुनिया ने बताया कि मेडिकल पेशे की आचार संहिता (मेडिकल कोड ऑफ एथिक्स) सभी प्रकार के डॉक्टरों पर समान रूप से लागू होती है। नए आदेश सोमवार से लागू किए गए हैं। डॉ. रणदीप ने बताया कि यह स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से प्राप्त आदेशों को सख्ती से लागू किया जाएगा। इससे पूर्व वर्ष 2018 में भी आदेश जारी किए गए थे। आदेश अब दोबारा सख्ती से लागू करने की अनुशंसा राज्य स्वास्थ्य मुख्यमंत्री ने की है। जेनेरिक दवा बनाने वाले घटक के मूल नाम से ही लिखी जाएंगी। यह दवाएं अमूमन सस्ते दर पर उपलब्ध होती हैं। ऐसा न करने वाले डॉक्टर की मरीज जिला स्वास्थ्य विभाग से शिकायत कर सकते हैं। मामले पर सख्ती से संज्ञान लिया जाएगा।
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