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जिला प्रशासन ने नहीं की कोई कार्रवाई, लोगों में डर

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फरीदाबाद। खोरी गांव में तोड़फोड़ की कार्रवाई के नाम पर अभी तक खामोशी बनी हुई है। पांच सप्ताह का समय बीत गया है। अंतिम सप्ताह में बैठक का दौर चल रहा है, लेकिन तोड़फोड़ पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया। दूसरी ओर जिला प्रशासन और नगर निगम के सुस्त रवैये को देख घरों को खाली कर गए लोग वापस लौटने लगे है। सोमवार को निगम की ओर से गांव में कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं मलवा भी नहीं उठाया गया। दूसरी ओर सोमवार शाम अधिकारियों ने सूरजकुंड में एक बार फिर वन विभाग सहित सभी विभागों की बैठक बुलाई है। इसे प्रशासन की अंतिम बैठक बताया गया है।
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अरावली वन क्षेत्र में बसे गांव खोरी में करीब 10 हजार मकान बने हुए है। सात जून को सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार और नगर निगम को खोरी में तोड़फोड़ कर जंगल की जमीन को जंगल बनाने के आदेश दिए थे। छह हफ्ते में नगर निगम को तोड़फोड़ कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए। इसके बाद से नगर निगम व जिला प्रशासन काफी सक्रियता दिखाई। गांव में मकानों को खाली करने के लिए नगर निगम द्वारा मुनादी कराई जा रही है। पुलिस की टीम घर-घर जाकर लोगों को घर खाली करने के लिए बोल रही है।
जिला उपायुक्त यशपाल यादव, निगमायुक्त यशपाल व डीसीपी एनआईटी अंशु सिंगला द्वारा लोगों को स्वंय घरों को खाली करने की अपील की जा रही है। इसका असर भी देखने को मिला है। अनेक लोग गांव से घरों को खाली करके दूसरी जगह चले गए थे। सरदार कॉलोनी में लोगों ने स्वयं घरों को खाली कर अपना मलवा ठेकेदार को बेचा। इन सबके बावजूद अभी भी भारी संख्या में लोग गांव में बसे हुए है और जमीन छोड़कर जाने के लिए तैयार नहीं हैं।
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वर्जन
खोरी गांव में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनुपालना की जाएगी। गांव में तोड़फोड़ कार्रवाई कभी भी शुरू की जा सकती है। अब लोगों को घर खाली करने के लिए कोई मौका नहीं दिया जाएगा। अब केवल कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. गरिमा मित्तल, नगर निगम आयुक्त
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