74 किमी हाईवे पर टोल वसूली पूरी, घायलों के लिए सिर्फ दो एंबुलेंस का सहारा
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112 और स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस पर निर्भरता
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर भारी भरकम टोल वसूली के बावजूद हादसों में घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था पूरी नहीं है। फरीदाबाद के बदरपुर बॉर्डर से पलवल के करमन बॉर्डर तक करीब 74 किलोमीटर के हिस्से में दो टोल प्लाजा हैं। इनके बीच करीब 74 किलोमीटर की दूरी में आपातकालीन चिकित्सा के लिए सिर्फ दो एंबुलेंस की व्यवस्था है। इनमें एक बड़खल और दूसरी गदपुरी टोल पर तैनात रहती है। यानी प्रत्येक एंबुलेंस को करीब 37 किलोमीटर का हिस्सा कवर करना पड़ता है।
एक साथ हादसे हुए तो बढ़ेगी परेशानी-
हाईवे पर रोजाना करीब एक लाख से अधिक छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में एक ही समय में अलग-अलग स्थानों पर हादसे होने पर एंबुलेंस की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई मामलों में घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए डायल-112 की पुलिस गाड़ियों और स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस पर निर्भर रहना पड़ता है। 112 पर सूचना मिलने के बाद नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात एंबुलेंस को मौके पर भेजकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया जाता है। कई बार राहगीर घायलों को ऑटो में अस्पताल तक भिजवाते हैं।
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पलवल जिले की गदपुरी से करमन बॉर्डर तक करीब 50 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र में एनएचएआई के पास सिर्फ एक एंबुलेंस होने की जानकारी है। इसके अलावा दो पेट्रोलिंग गाड़ियां और एक रिकवरी वाहन की व्यवस्था है। करीब 50 किलोमीटर के स्ट्रेच के लिहाज से एंबुलेंस की संख्या कम होने से स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस पर दबाव बढ़ता है।
हाईवे पर टूटी पड़ी सर्विस लेन, खराब स्ट्रीट लाइटों से राहगीर परेशान
गदपुरी और करमन टोल प्लाजा पर प्रतिदिन करीब 95 लाख रुपये टोल वसूली होने के बावजूद हाईवे पर कई जगह अव्यवस्थाएं बनी हुई हैं। टूटी सर्विस लेन, जलभराव, खराब सड़क, पर्याप्त स्ट्रीट लाइट का अभाव और टूटे डिवाइडर व ग्रिल राहगीरों के लिए परेशानी का कारण हैं। कई स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल, सूचना पट और संकेत बोर्ड भी पर्याप्त नहीं हैं। सड़क किनारे मनमाने ढंग से खड़े वाहन भी हादसों का कारण बन रहे हैं।
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एंबुलेंस में देरी बनी चिंता
हाईवे पर दुर्घटना होने के बाद एंबुलेंस को मौके तक पहुंचने में कई बार 30 मिनट तक लग जाते हैं, जबकि सामान्य औसत समय करीब 15 मिनट है। हादसे के बाद शुरुआती एक घंटा यानी ‘गोल्डन आवर’ घायल के लिए बेहद अहम होता है। ऐसे में एंबुलेंस के कारण होने वाली देरी जानलेवा साबित हो सकती है। वाहन चालकों ने हाईवे पर एंबुलेंस की संख्या बढ़ाने के साथ पेट्रोलिंग और आपातकालीन सुविधाएं मजबूत करने की मांग की है।
एनएच-44 पर आपात स्थिति में लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए एंबुलेंस और पेट्रोलिंग वाहनों की व्यवस्था की गई है। हादसे की सूचना मिलते ही नजदीकी एंबुलेंस को मौके पर भेजा जाता है।- बजरंग सैनी, सीनियर टोल मैनेजर, क्यूब हाईवेज